झोली में स्वम गिरते है प्रकरण बसना वन विभाग में।

वाह वाह क्या बात है?
देखिये एक के बाद एक प्रकरण वन विभाग की झोली में गिरते दिख रहे है।
1,आस्था राईस मिल के पास खैर लकड़ी से भरी 407 वाहन स्वयं पलट कर इन की झोली में गिरी।
2,जामुन लकड़ी से भरी ट्रेक्टर ट्राली भी खुद ही झोली में गिरी।
3,बसना वन विभाग के कार्यालय के सामने सरेआम शीशम के पेड़ को काट दिया गया,इस प्रकरण को भी घुमा फिरा कर अपनी ही झोली में डालेंगे बसना वन विभाग के कर्मचारी अधिकारी।
विदित हो कि बसना वन परिक्षेत्र में पदस्त एक कर्मचारी के रहते इस तरह के कारनामो का होते रहना आम बात हो चला है।

चाहे हिरन के बच्चे का प्रकरण हो या वयस्क चीतल शिकार का प्रकरण हो या जंगली सुअर शिकार के अनेकों प्रकरण,बड़ी

आसानी से इसी के मार्फ़त अधिकारियों तक या नेताओ तक पहुंचा कर सुलभता से निबटा दिए जाते है।
ये अधिकारियों के लिए बोतल बन्द जिन्न की तरह है,अधिकारी या नेता आवज़ तो दे,ये तुरन्त हाज़िर जिन्न की तरह ,हुकुम मेरे आका कहते हुए हाज़िर।
शासन बी जे पी का हो या कांग्रेस का इस की तो चांदी रहती है ।
अधिकारियों की कमज़ोरी को नेताओं और ब्लैकमेलरो तक पहुंचाने में सेतु का काम इसी का रहता है।
सूत्रों की माने तो इस के इशारे पर चलती है,वन परिक्षेत्र कार्यालय बसना।
बसना क्षेत्र को इसके प्रताप और प्रकोप से बचाना है।
क्योंकि वन परिक्षेत्र बसना को ,
छतीसगढ में नम्बर वन बनाना है,
जंगल को बचाना है।
रोज़ समाचार बनाना है।
चाटुकारिता खत्म करना है।
कलम की ताक़त दिखाना है।
कलम की ताकत दिखाना है।






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