प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में मुस्लिम प्रतिनिधित्व: योग्यता और भागीदारी की नई तस्वीर...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
खाई जा रही राजनीतिक बहस और ज़मीनी हकीकत -
भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में अल्पसंख्यक समुदायों की राजनीतिक व प्रशासनिक भागीदारी को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। विपक्ष द्वारा यह बात उठाई जाती रही है कि वर्तमान शासन प्रणाली में अल्पसंख्यकों को उचित मंच या प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता है। हालांकि, यदि संगठनात्मक ढांचे, प्रशासनिक तंत्र और ज़मीनी स्तर पर नजर डाली जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि व्यवस्था में कार्यकुशलता और योग्यता को सर्वोपरि रखा गया है। 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र के तहत, छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में कई कुशल अधिकारी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
संगठन से लेकर प्रशासन तक नेतृत्व -
राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक भागीदारी: भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन में कई अहम बदलाव करते हुए अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले अनुभवी चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। पूर्व शिक्षाविद और कुलपति प्रो. तारिक मंसूर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर सक्रिय हैं, वहीं ज़मीनी स्तर से जुड़े कुंवर बासित अली अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ और देश में प्रशासनिक और सिविल सेवा के चेहरे: प्रशासनिक व्यवस्था में नियुक्तियां योग्यता और चयन परीक्षाओं के आधार पर होती हैं। छत्तीसगढ़ और केंद्र के विभिन्न विभागों में कई वरिष्ठ अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
शम्मी आबिदी - सचिव स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग में योगदान।
मोहम्मद कैसर अब्दुलहक - पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग में सचिव पद पर कार्यरत।
तंबोली अय्याज फकीरभाई - मंत्रिमंडल सचिवालय में संयुक्त सचिव।
इफ्फत आरा - राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव।
शहला निगार - कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव, कृषि विकास तथा किसान कल्याण विभाग।
डॉ. फरीहा आलम - स्कूल शिक्षा और श्रम विभाग में संयुक्त सचिव।
आरिफ एच. शेख - छत्तीसगढ़ के कई जिलों में एसपी के रूप में कार्य कर चुके अनुभवी आईपीएस अधिकारी।
रेना जमील - सूरजपुर जिले की कलेक्टर के रूप में पदस्थ।
सिम्मी नाहिद - अपर कलेक्टर, रायपुर के पद पर कार्यरत।
इसके अलावा, विभिन्न जिलों में थाना प्रभारी, तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक पदों पर भी अधिकारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो जनसेवा और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण में जुटे हैं।
योग्यता आधारित मूल्यांकन -
प्रशासनिक सेवाओं में किसी भी अधिकारी का चयन और उसकी पदस्थापना पूरी तरह से सेवा नियमों, प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार होती है। राजनीतिक दलों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर भले ही वैचारिक मतभेद रहे हों, लेकिन यह भी सच है कि शासन में कार्यकुशलता, योग्यता और पारदर्शी नीतियों को ही प्राथमिकता दी जाती है।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments