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बच्चों के शोषण से जुड़े कंटेंट पर रोक, मेटा का बड़ा कदम...

Aug 18
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

नई दिल्ली :- अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी मेटा भारत में अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) के प्रसार और दोबारा सामने आने को रोकने के लिए सरकार के साथ चल रही बातचीत के बीच अपनी कोशिशें तेज कर रही है। NDTV प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया कंपनी और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के बीच बातचीत मुख्य रूप से मेटा द्वारा गैर-कानूनी कंटेंट को संभालने और हानिकारक कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने के बाद उसके दोबारा सामने आने से रोकने की डिजिटल प्लेटफॉर्म की व्यापक जिम्मेदारी पर केंद्रित रही है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक कंपनी ऐसे कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठा रही है और इसे लेकर खास तौर पर सतर्क है क्योंकि CSAM भारतीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अलावा, कंपनी उन मामलों से निपटने के लिए भी काम कर रही है जिनमें पहले चिह्नित किया गया कंटेंट उसके प्लेटफॉर्म पर दोबारा सामने आता है। रिपोर्ट में बताए गए सूत्रों के अनुसार, सरकार ने फिर से कहा है कि अगर प्लेटफॉर्म लागू कानूनी आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रहते हैं तो उन्हें 'सेफ हार्बर' सुरक्षा नहीं मिलेगी। हालांकि, अधिकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सेंसर करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।


रिपोर्ट में कहा गया है, "प्लेटफॉर्म को सामाजिक भलाई और नुकसान के बीच सही संतुलन बनाने की जरूरत है।" इसमें आगे कहा गया है कि लत और शोषणकारी कंटेंट का प्रसार जैसे मुद्दे सोशल मीडिया सेवाओं से जुड़ी मुख्य चिंताएं बनी हुई हैं। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने भारत में कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को बनाने और लागू करने में सांस्कृतिक संदर्भ के महत्व पर भी जोर दिया है। इसके अलावा, जानकारी के अनुसार, मंत्रालय अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल बहुत कम कर रहा है और इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि प्लेटफॉर्म अपनी कानूनी जिम्मेदारियां पूरी करें।


हालांकि प्रतिबंधित कंटेंट को होस्ट करने के लिए मध्यस्थ (इंटरमीडियरीज) 'सेफ हार्बर' सुरक्षा खो सकते हैं, लेकिन किसी खास मामले में ऐसी सुरक्षा लागू होगी या नहीं, यह तय करना आखिरकार अदालतों का काम है, जो निर्धारित कानूनी शर्तों के पालन के आधार पर फैसला करती हैं। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भर में रेगुलेटर कंटेंट मॉडरेशन के तरीकों, यूजर की सुरक्षा और स्थानीय कानूनों के पालन को लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जांच-पड़ताल बढ़ा रहे हैं।

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