महासमुंद में पुलिस का बड़ा एक्शन: 50 करोड़ का गांजा जब्त, 501 तस्कर गिरफ्तार....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध नशे के कारोबार पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष 'ऑपरेशन निश्चय' के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस साल के शुरुआती नौ महीनों में पुलिस ने करीब 10,000 किलोग्राम यानी 100 क्विंटल मादक पदार्थ जब्त किया है। बरामद माल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 50 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। इस पूरी अवधि के दौरान महकमे ने 177 मामले दर्ज कर 501 सौदागरों को शिकंजे में लिया है, जबकि 70 अन्य आरोपित अभी भी कानून की पकड़ से दूर हैं जिनकी तलाश में टीमें जुटी हुई हैं। इस धंधे में इस्तेमाल हो रहे लगभग 10 करोड़ रुपये के चार पहिया और अन्य वाहन भी जब्त किए गए हैं। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि नशे की यह खेप मुख्य रूप से ओडिशा से लाई जा रही थी और इसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत देश के कई अन्य हिस्सों में खपाया जा रहा था।
विस्तृत नेटवर्क और गिरफ्तारियों का दायरा -
नशा तस्करी के इस बड़े जाल को तोड़ने के लिए पुलिस ने सुनियोजित तरीके से कदम उठाए हैं। कुल 177 प्रकरणों में पकड़े गए 501 लोगों में से 289 सीधे तौर पर परिवहन में संलिप्त पाए गए। इसके अलावा, इस सिंडिकेट की तह तक जाते हुए अकेले ओडिशा से ही 145 सप्लायरों को उठाया गया है। फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस रिकॉर्ड में अन्य संलिप्तों की गिरफ्तारी भी दर्ज की गई है।
इंटरस्टेट रूट और गंतव्य राज्य -
तस्करों के रूट का विश्लेषण करने पर पता चला कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। पकड़े गए सौदागरों में ओडिशा से 138, छत्तीसगढ़ से 138, महाराष्ट्र से 103, मध्य प्रदेश से 73 और उत्तर प्रदेश से 54 लोग शामिल हैं। बरामद मादक पदार्थ के गंतव्यों की बात करें तो सबसे बड़ी खेप यानी 4,511 किलोग्राम महाराष्ट्र भेजी जा रही थी। इसके अलावा 2,263 किलोग्राम उत्तर प्रदेश, 1,223 किलोग्राम मध्य प्रदेश, 264 किलोग्राम राजस्थान, 179 किलोग्राम गुजरात और 30 किलोग्राम हरियाणा के लिए रवाना की जानी थी।
ओडिशा के इन जिलों से हो रही थी सप्लाई -
जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रतिबंधित माल की पूरी खेप पड़ोसी राज्य ओडिशा के विभिन्न इलाकों से आ रही थी। कालाहांडी जिले से सबसे अधिक 2,679 किलोग्राम खेप पकड़ी गई। इसके अलावा कंधमाल से 2,153 किलोग्राम, बौद्ध से 1,177 किलोग्राम, रायगढ़ा से 950 किलोग्राम, सोनपुर से 872 किलोग्राम और बलांगीर से 791 किलोग्राम माल बरामद किया गया। इसके अतिरिक्त देवगढ़, नुआपाड़ा, भुवनेश्वर, बरगढ़ और अंगुल क्षेत्र भी इस अवैध सप्लाई चेन का हिस्सा रहे हैं।
तस्करी के अनोखे तरीके और वाहन -
पुलिस की पकड़ से बचने के लिए आरोपियों ने परिवहन के बेहद शातिर तरीके अपनाए थे। गांजे की ढुलाई के लिए सामान्य बसों, ट्रेनों और ट्रकों के अलावा एंबुलेंस, कोरियर वैन और मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल किया जा रहा था। माल को छुपाने के लिए फलों की पेटियों, ट्रकों में बनाए गए गुप्त चेंबर (चिपके हुए विशेष खाने), सब्जियों के वाहनों और पैकर्स एंड मूवर्स के सामान का सहारा लिया गया। हालांकि, लगातार नाकेबंदी और मुखबिर तंत्र की सक्रियता के कारण ये तरकीबें नाकाम हो गईं।
थानावार कार्रवाई और अन्य जब्ती -
जिले के थानों की बात करें तो सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा 3,325 किलोग्राम माल पकड़ा गया। इसके बाद कोमाखान में 2,970 किलोग्राम और बसना क्षेत्र में 2,683 किलोग्राम जब्ती दर्ज की गई। केवल गांजा ही नहीं, बल्कि पुलिस ने डोडा जैसे अन्य नशीले पदार्थों पर भी प्रहार किया है। इस वर्ष अब तक 1,432 किलोग्राम डोडा पकड़ा जा चुका है, जिसकी कीमत करीब 2.14 करोड़ रुपये है। साथ ही, कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अब तक लगभग 5,700 किलोग्राम जब्त मादक पदार्थ को नष्ट भी किया जा चुका है, जिसकी कीमत 28 करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। महकमे ने साफ कर दिया है कि इस अवैध कारोबार से जुड़े बाकी बचे हुए 70 फरार लोगों को भी जल्द ही सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा।






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