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छत्तीसगढ़ में बड़ा फर्जीवाड़ा: आईसीयू में दो साल से कर रहा था मरीजों का इलाज, क्यूआर कोड स्कैन करते ही ऐसे खुली पोल....

15 hours ago
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था को झकझोर देने वाला बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की औचक जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ, जिसमें बिना वैध योग्यता के मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का खुलासा हुआ है।


प्रशासनिक जांच में पता चला कि गांधीनगर स्थित एक निजी अस्पताल के आईसीयू विभाग में लंबे समय से एक संदिग्ध चिकित्सक सेवाएं दे रहा था। जब अधिकारियों ने उसके शैक्षणिक दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की और एमबीबीएस डिग्री पर बने क्यूआर कोड को स्कैन किया, तो सारा सच सामने आ गया। स्कैन करते ही यह साफ हो गया कि वह रजिस्ट्रेशन किसी अन्य चिकित्सक के नाम पर दर्ज है।


झारखंड के डॉक्टर के नाम पर मिला पंजीयन -

विभागीय पड़ताल में यह बात सामने आई कि जिस क्यूआर कोड और पंजीयन का उपयोग किया जा रहा था, वह असल में झारखंड के रांची निवासी अमरेश कुमार के नाम पर पंजीकृत था। दस्तावेजों में कथित तौर पर हेरफेर कर और कूटरचना कर उस पर दूसरा नाम प्रदर्शित किया गया था। इस गंभीर गड़बड़ी के उजागर होने के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।


कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई -

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए। कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना से जुड़ी गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।


आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका भी संदेह के घेरे में -

शुरुआती जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि संबंधित व्यक्ति को एक आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य सेवा एजेंसी के माध्यम से अस्पताल में तैनात किया गया था। अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि बिना बुनियादी दस्तावेजों और मेडिकल काउंसिल के सत्यापन के इतनी संवेदनशील जगह पर नियुक्ति कैसे दी गई। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क, अस्पताल प्रबंधन और संबंधित एजेंसी की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवधि में कितने मरीजों का उपचार किया गया था।

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