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रायपुर के वरदान अस्पताल में आयुष्मान योजना का बड़ा फर्जीवाड़ा....

Oct 14
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

रायपुर के शंकर नगर स्थित वरदान अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़े पैमाने पर धांधली का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। राज्य स्तरीय जांच टीम की अचानक हुई छापेमारी में अस्पताल की गंभीर लापरवाही और फर्जीवाड़े की परतें उधड़ गई हैं। मामूली बीमारियों को गंभीर बताकर सरकारी योजना के फंड में सेंध लगाने का यह खेल स्वास्थ्य महकमे में चर्चा का विषय बन गया है।


जांच दल जब रविशंकर उद्यान के समीप स्थित इस केंद्र पर पहुंचा, तो अंदर का नजारा हैरान करने वाला था। जनरल और प्राइवेट वार्ड के साथ आईसीयू के बिस्तर खाली पड़े थे। रिसेप्शन और नर्सिंग काउंटर पर किसी भी रोगी का चिकित्सकीय ब्योरा या डॉक्टर के निर्देश उपलब्ध नहीं थे। कड़े रुख के बाद प्रबंधन ने कागजात चार घंटे की देरी से मुहैया कराए। शुरुआती तफ्तीश में पता चला कि पहली मंजिल पर भर्ती चारों रोगी मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के निवासी थे, जिन्हें किसी बिचौलिए के मार्फत यहां लाया गया था। स्थानीय स्तर पर एक भी मरीज का इलाज न होना इस पूरे प्रकरण को सुनियोजित गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।


गहन पड़ताल में यह भी सामने आया कि आईसीयू में भर्ती दो लोगों—एक को तीव्र पेट दर्द और दूसरे को फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित बताया गया था—का कोई एक्स-रे या जरूरी स्कैन तक नहीं कराया गया था। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा पीताम्बर कुंभार के प्रकरण में पकड़ा गया, जिन्हें शरीर पर केवल एक छोटी सी सामान्य गांठ (लिपोमा) की शिकायत थी। इसके बावजूद संस्थान ने उन्हें खतरनाक अग्नाशय शोथ (एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस) की श्रेणी में दर्ज कर दाखिल कर लिया था।


व्यवस्था की पोल यहीं नहीं खुली। योजना के तहत आने वालों का आधिकारिक पंजीयन रजिस्टर गायब मिला, और मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड अस्त-व्यस्त स्थिति में मिले। पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. संजीव तिवारी के अनुबंध या नियुक्ति से जुड़ा वैध दस्तावेज भी टीम के मांगने पर प्रस्तुत नहीं किया जा सका। सामान्य लक्षणों को बढ़ा-चढ़ाकर महंगे चिकित्सीय पैकेज भुनाने का यह गोरखधंधा साफ उजागर हो चुका है।


स्वास्थ्य सेवाओं के प्रादेशिक निदेशालय ने इस गंभीर अनियमितता पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रबंधन को औपचारिक नोटिस थमा दिया है। उनसे तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया गया है कि क्यों न नियमों के उल्लंघन के एवज में संस्थान पर अनुशासनात्मक और कानूनी शिकंजा कसा जाए। गरीब जनता के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में स्थापित इस योजना को निजी मुनाफे का जरिया बनाने वालों पर अब गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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