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चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा सवाल: वोटर लिस्ट से 25 लाख नाम हटाने के मामले में कांग्रेस का तीखा हमला, चुनाव आयोग और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप...

32 minutes ago
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-

रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से लाखों नाम विलोपित किए जाने का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। हाल ही में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत राज्यभर में 24 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने पर सियासी घमासान छिड़ गया है। मुख्य विपक्षी दल ने इस पूरी कार्रवाई को लोकतंत्र के इतिहास का सबसे बड़ा सुनियोजित घोटाला करार दिया है।


पार्टी के संचार प्रमुख ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्ताधारी दल संभावित हार के डर से प्रशासनिक तंत्र और चुनाव आयोग के कंधों का इस्तेमाल कर रहा है। बिना किसी जमीनी और भौतिक सत्यापन के, केवल कंप्यूटर एल्गोरिदम और डिजिटल फिल्टर के जरिए गरीबों, मजदूरों, आदिवासियों और युवाओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं।


बिना भौतिक सत्यापन के थोपी गई कार्रवाई -

सामने आए तथ्यों के मुताबिक, सूची से हटाए गए मामलों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें 'अनुपस्थित', 'शिफ्टेड' या 'मृत' दर्शाया गया है। पार्टी का आरोप है कि बिना घर-घर जाकर जांच किए थोकबंद तरीके से नाम काटना प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है।


बिलासपुर, रायपुर, बिरगांव, बालोद, दुर्ग और बस्तर जैसे क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जहां फॉर्म-7 का मनमाना दुरुपयोग किया गया है। उदाहरण के तौर पर, पूर्व में जब आपत्ति दर्ज कराई गई और भौतिक सत्यापन हुआ, तो हटाए गए मतदाता अपनी जगहों पर सही पाए गए, जिसके बाद उन्हें उनका मताधिकार वापस दिलाना पड़ा।


मुख्य विपक्षी दल की प्रमुख मांगें -

  • लिखित नोटिस की अनुपस्थिति: यदि यह एक सामान्य या रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया थी, तो नाम विलोपन से पहले संबंधित नागरिकों को नोटिस क्यों नहीं दिया गया?

  • सार्वजनिक हो सूची: सरकार और प्रशासन में यदि पारदर्शिता है, तो प्रभावित 25 लाख लोगों की पूरी सूची सार्वजनिक कर बूथ स्तर पर पारदर्शी जांच कराई जाए।

  • पंचनामा और सत्यापन अनिवार्य: मांग की गई है कि बीएलओ (BLO) सीधे तौर पर उन सभी पतों पर जाकर मौका मुआयना करें, पंचनामा तैयार करें और स्थानीय निकायों की सामान्य सभा में विधिवत सत्यापन के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।


राजनीतिक गलियारों में इस तीखे विरोध के बाद अब प्रशासनिक हलकों और आयोग की तरफ से क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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