गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही ,मरीजों की मौत के बाद डी.डी. हॉस्पिटल पर बड़ा एक्शन....

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, चिकित्सा के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले और नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे सेमरा (गौरेला रोड) स्थित डी.डी. हॉस्पिटल पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है, गंभीर लापरवाहियों के चलते दो महिला मरीजों की मौत के बाद कलेक्टर और पर्यवेक्षी प्राधिकारी ने अस्पताल को तत्काल सील करने का आदेश जारी कर दिया है, वहीं अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) भी अस्थायी और सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है |
एम्बुलेंस से मरीज का ‘डायवर्जन’, तड़प-तड़प कर हुई मौत -
आधिकारिक आदेश के अनुसार, विकासखंड पेण्ड्रा के ग्राम बेदरचुआ की रहने वाली ज्योति सोनवानी को 11 जून 2026 को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल से सिम्स (SIMS) बिलासपुर रेफर किया गया था, लेकिन संवेदनहीनता की हद पार करते हुए, रास्ते में ही एक एजेंट ने एम्बुलेंस को रोक लिया और मरीज को बहला-फुसलाकर बिना मूलभूत सुविधाओं वाले डी.डी. अस्पताल में भर्ती करा दिया, वहां 11 जून से 16 जून तक मरीज का इलाज अत्यंत लापरवाही पूर्वक किया गया, स्थिति पूरी तरह बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे सिम्स बिलासपुर रेफर कर पल्ला झाड़ लिया, जहां इलाज के दौरान ज्योति की मौत हो गई |
परिजनों ने किया चक्काजाम -
मौत के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव को डी.डी. अस्पताल सेमरा तिराहे पर रखकर चक्काजाम कर दिया , परिजनों का आरोप था कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत भर्ती होने के बावजूद उनसे 1.45 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की अवैध वसूली की गई |
जांच टीम के निरीक्षण में खुली पोल -
बिना डॉक्टर के चल रहा था अस्पताल चक्काजाम और जनआक्रोश के बाद जब 17 और 18 जून 2026 को प्रशासनिक अधिकारियों और डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, तो होश उड़ाने वाली हकीकत सामने आई, जांच के दौरान अस्पताल में 11 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 3 मरीजों का ऑपरेशन (सर्जरी) हो चुका था, लेकिन गंभीर मरीजों और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के लिए अस्पताल में एक भी डॉक्टर या दक्ष नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था
अस्पताल में न तो कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) था और न ही निश्चेतना विशेषज्ञ (Anesthetist), फिर भी धड़ल्ले से गंभीर ऑपरेशन किए जा रहे थे, झूठे दावों पर खुली पोल: अस्पताल संचालक डी डी अस्पताल ने लिखित में दावा किया था कि उनके यहां ‘एक्लैम्पसिया’ का इलाज संभव है, जबकि जांच में सामने आया कि संस्थान में इसकी कोई सुविधा ही नहीं थी.एक्ट के नियमों के मुताबिक आपातकालीन सेवाओं के लिए अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर की उपलब्धता अनिवार्य है, जिसका यहाँ कोई पालन नहीं हो रहा था |
नोटिस का नहीं मिला संतोषजनक जवाब -
इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने पत्र क्रमांक 738, दिनांक 23 जून 2026 को अस्पताल प्रबंधन को 06 बिंदुओं का ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था. अस्पताल संचालक बी.डी. अग्रवाल द्वारा 30 जून 2026 को दिया गया जवाब पूरी तरह से अतार्किक और असंतोषजनक पाया गया |
कलेक्टर का कड़ा एक्शन -
चिकित्सा के अभाव और घोर लापरवाही के कारण 2 मरीजों की मृत्यु को अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए कलेक्टर / पर्यवेक्षी प्राधिकारी ने आज (4 जुलाई) को कड़ा आदेश जारी किया, छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम 2010 के तहत अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर (OT), आई.सी.यू. (ICU) और वार्ड को पूरी तरह सील कर दिया गया है, इस आदेश की प्रतिलिपि सचिव (छत्तीसगढ़ शासन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग), स्वास्थ्य संचालक (नवा रायपुर) और पुलिस अधीक्षक (GPM) समेत संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है |






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