भूपेश सरकार में ग्रामीणों को आजीविका की गारंटी, पशुपालक बोले- अब पशुपालन के लिए सोचना नहीं पड़ता....

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के उद्देश्य से प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ संचालित किया जा रहा है. बिहान योजना मूल रूप से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका गारंटी के विकल्प के रूप में उभरी है. जिसके तहत राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कई तरह के रोजगार और आजीविका के सृजन के लिए महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया जा रहा है |
सरकार के इस मिशन को अब पशु सखियां संभाल रही हैं. जिसके बाद से गांव की तस्वीर बदलने लगी है. ये पशु सखियां गांव-गांव जाकर मुर्गी, बकरी और सूअर जैसे जानवरों का इलाज कर रही हैं. नतीजन अब गांवों में जानवरों की असमय मृत्यु में कमी आई है. जिससे अन्नदादता भी खुशहाल हैं. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एक दूरदर्शी सोच के साथ सुराजी गांव योजना की शुरुआत हुई. योजना के अंतर्गत बने गौठान और अब महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क (रीपा) बन चुके हैं. छत्तीसगढ़ में गौठान, पशुधन की सुरक्षा और उनसे आर्थिक लाभ का सशक्त माध्यम बन चुके हैं. अब गौठान रोजगार का जरिया बन चुका है. साथ ही पशुओं के लिए भी यह वरदान बन गया है.
पशु सखियों को पशु चिकित्सा विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्रों के सहयोग से 10 दिनों का प्रशिक्षण देकर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के बेहतर इलाज के लिए महिलाओं को पशु उद्योग सखी बनाया गया है. इसके बाद एक महीने का फील्ड एक्सपोजर और प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया. अंतिम चरण में दो दिवसीय प्रशिक्षण के बाद टेस्ट में मिली ग्रेडिंग के आधार पर इन पशु सखी और उद्योग सखी को क्षेत्रों में लगाया गया. जिससे कुल 6148 सखियां रोजगार से जुड़ीं |






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