शराब घोटाला: मुख्य नाम जांच के दायरे में बाहर, हर माह 80 लाख की अवैध वसूली का खुलासा.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
हजारों करोड़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की आंच भले ही लगातार तेज हो रही हो और अब तक ईडी व एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा कई चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हों, लेकिन आबकारी विभाग के एक प्रमुख अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच एजेंसियों के शिकंजे में कई नाम शामिल हैं, मगर इस पूरे खेल में अहम भूमिका निभाने वाले आबकारी अधिकारी आशीष श्रीवास्तव पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पुख्ता सबूत होने के बावजूद इस अधिकारी को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते वह वर्तमान में भी विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर बने हुए हैं।
जांच में सामने आए नए तथ्यों के मुताबिक, पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) मैनपावर भुगतान घोटाले में व्यापक स्तर पर कमीशनखोरी का खेल चला था। सरकारी शराब दुकानों के कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त दिनों के नाम पर मैनपावर एजेंसियों को बढ़ा हुआ भुगतान किया जाता था, जिसके एवज में हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये की नकदी बतौर कमीशन वसूली जाती थी।
दस्तावेजों और बयानों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में इन एजेंसियों से करोड़ों रुपये नकद वसूलकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों तक पहुंचाए जाते थे। अकेले एक प्रमुख एजेंसी द्वारा करोड़ों की राशि सौंपे जाने का दावा किया गया है। अधिकारियों की मिलीभगत से हुए इन भुगतानों और कमीशन नेटवर्क के खुलासे के बाद भी मलाईदार पदों पर बैठे अफसरों पर कार्रवाई न होना व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाता है।
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