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कोजागर पूर्णिमा विशेष: 25 अक्टूबर को रखा जाएगा शरद पूर्णिमा का व्रत....

Oct 21
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- रायपुर:- हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष और अलौकिक महत्व है। इस पावन दिन पर चंद्रमा की पूजा, मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के स्मरण के साथ ही रात को चांदनी के नीचे खीर रखने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। ऐसी गहरी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी गई खीर विशेष रूप से गुणकारी और अमृत समान बन जाती है। इस वर्ष शरद पूर्णिमा का व्रत 25 अक्टूबर 2026, रविवार को रखा जाएगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि खीर रखने और उसे ग्रहण करने का सही समय और नियम क्या हैं।


चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की पौराणिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर आसमान में चमकता है। इस रात चंद्रमा की किरणों को अमृत के समान गुणकारी माना जाता है। इसी विश्वास के साथ दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाता है, ताकि उस पर सीधी चांदनी पड़ सके। कई परिवारों में इस खीर को सबसे पहले भगवान को भोग लगाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। कुछ लोग इसे रात में ही ग्रहण करते हैं, तो कुछ परिवारों में अगले दिन सुबह खीर खाने की परंपरा है। यह प्रथा पूरी तरह से पारिवारिक परंपराओं और मान्यताओं पर निर्भर करती है।


खीर खाने और ग्रहण करने का सही समय

परंपरागत रूप से, खीर को शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद पूजा-अर्चना करके प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

  • कुछ परिवारों में खीर को पूरी रात चांदनी में रखने के बाद अगले दिन सूर्योदय से पहले यानी सुबह लगभग 4:00 बजे के आसपास इसे खाना बेहद शुभ माना जाता है।

  • हालांकि, यह कोई सार्वभौमिक नियम नहीं है। सही समय स्थानीय पंचांग, पूर्णिमा तिथि और आपकी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तय किया जा सकता है।

  • सबसे पहले इस खीर को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है, जिसके बाद इसे परिवार के सभी सदस्यों में बांटा जाता है।


शरद पूर्णिमा की खीर का धार्मिक महत्व

अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली शरद पूर्णिमा को 'कोजागर पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस खास रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो भक्त रात्रि में जागकर उनकी आराधना करते हैं, माता उन पर विशेष कृपा बरसाती हैं।

यही वजह है कि श्रद्धालु रात में मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें खीर का भोग लगाते हैं। इसके अलावा, कई परिवार इस अवसर पर खुले स्थान में पानी से भरा पात्र भी रखते हैं, जिसका उपयोग अगले दिन सुबह धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।


सावधानी: खीर रखने और खाने के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

धार्मिक आस्था के साथ-साथ सेहत और साफ-सफाई का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है:

  1. खीर तैयार करने के बाद उसे पूरी तरह साफ और सुरक्षित स्थान पर रखें।

  2. चांदनी में रखते समय बर्तन को जालीदार कपड़े या हल्के ढक्कन से ढकें, ताकि धूल, मिट्टी और कीड़े उसमें न गिर सकें।

  3. लंबे समय तक सामान्य तापमान पर रखे रहने के कारण दूध की चीजों में बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है, इसलिए रातभर बाहर रखी खीर की सुरक्षा और शुद्धता का खास ख्याल रखें।

  4. खीर का सेवन करने से पहले उसकी गंध, रंग और स्थिति की अच्छी तरह जांच कर लें। यदि खराब होने का थोड़ा भी संदेह हो, तो उसका सेवन बिल्कुल न करें। #SharadPurnima2026 #KojagiriPurnima #MaaLakshmi #LordVishnu #SharadPurnimaKheer #HinduFestivals #FestivalTraditions #IndianCulture #KheerRecipe #BreakingADNNews


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