google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

इस राज्य में जल्लीकट्टू बैलों को मिलेगी यूनिक आईडी....जाने क्यों

Aug 22, 2023
2 min read



































































तमिलनाडू की स्टालिन सरकार जल्लीकट्टू बैलों को विशिष्ट आईडी देने की तैयारी कर रही है। हर साल राज्य के 20 जिलों में आयोजित होने वाली जल्लीकट्टू और बैल रेसिंग में लगभग 16 से 19 हजार बैल भाग लेते हैं। अब तमिलनाडु सरकार सांडों की नाक के निशान का उपयोग करके सांडों को विशिष्ट आईडी प्रदान करने और सांडों का एक व्यापक डेटा बैंक बनाने की तैयारी कर रही है।


स्टालिन सरकार पारंपरिक खेल को सुव्यवस्थित करने और पूरे जल्लीकट्टू और बुल रेसिंग टूर्नामेंट को एक ही मंच पर लाने की कोशिश कर रही है, ताकि खेल के लिए एक संगठित व्यवस्था की जा सके। तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी तमिलनाडु पशुपालन और पशु चिकित्सा विज्ञान विभाग के साथ मिलकर एक नया पोर्टल बनाएगी जिसमें राज्य भर में जल्लीकट्टू बैल के बारे में सारी जानकारी होगी।


सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के पास राज्य में जल्लीकट्टू बैलों की संख्या का विशिष्ट विवरण नहीं है और पशु चिकित्सा और पशुपालन विभाग बैलों की भलाई और उनकी व्यस्तता पर नज़र रखने के लिए एक समर्पित मंच स्थापित करेगा। स्टालिन सरकार 14 से 17 जनवरी तक अलंगनल्लूर, पलामेडु और अवनियापुरम में जल्लीकट्टू कार्यक्रम आयोजित करती है। हालांकि, कई खेल प्रेमी और बैल खेल प्रेमी जनवरी से 31 मई तक राज्य भर के छोटे गांवों और कस्बों में इसतरह के कार्यक्रम आयोजित करते हैं। संबंधित जिला प्रशासन से अनुमति लेने के बाद जिसमें पुलिस, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग शामिल हैं।


नया पोर्टल तमिलनाडु के कई गांवों और मुफस्सिल कस्बों में आयोजित होने वाले जल्लीकट्टू टूर्नामेंट के लिए मंजूरी देने में लगने वाले समय को कम करने में मदद करेगा। सांडों की स्वास्थ्य स्थिति और उनकी विशेष जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। गौरतलब है कि जल्लीकट्टू टूर्नामेंट को मंजूरी देने में देरी के खिलाफ तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुआ था। बुल फाइटिंग या जल्लीकट्टू को तमिलनाडु में एक पारंपरिक खेल माना जाता है जो पोंगल (15 जनवरी) से शुरू होता है और मई तक जारी रहता है।

 
 
 

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html