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जगदलपुर: फर्जी दस्तावेजों से 10 साल तक हेराफेरी का आरोप......

Aug 17
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- 

जगदलपुर जगदलपुर की 5वीं वाहिनी सशस्त्र बल की कर्मचारी कल्याण साख समिति में करीब 3 करोड़ रुपये के कथित गबन के मामले में पुलिस जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। समिति के अध्यक्ष और प्रधान आरक्षक शिवकांत तिवारी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने उनके सहायक रहे प्रधान आरक्षक संजय चौहान को भी गिरफ्तार किया है। पूछताछ और जांच में वित्तीय लेनदेन से जुड़ी भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया गया है।


मामला कंगोली स्थित 5वीं वाहिनी सशस्त्र बल की कर्मचारी कल्याण साख समिति से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार समिति के वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच में वर्ष 2012 से 2021 के बीच लोन खातों और जमा राशि में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हेराफेरी किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि इस दौरान फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल किया गया और समिति की राशि में गड़बड़ी की गई। गबन की कुल रकम करीब 3 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामले की शिकायत मिलने के बाद परपा पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान समिति से जुड़े दस्तावेजों, बैंकिंग लेनदेन और लोन खातों की पड़ताल की गई। प्रारंभिक जांच में समिति के अध्यक्ष रहे प्रधान आरक्षक शिवकांत तिवारी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें 29 जुलाई को गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने समिति के अन्य कर्मचारियों और वित्तीय कामकाज से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच तेज कर दी।


इसी क्रम में प्रधान आरक्षक संजय चौहान का नाम सामने आया। बताया जा रहा है कि संजय चौहान समिति के अध्यक्ष शिवकांत तिवारी के सहायक के रूप में वित्तीय कामकाज से जुड़े हुए थे। पुलिस ने उनसे मामले को लेकर पूछताछ की और उपलब्ध दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर उनकी भूमिका की जांच की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। अब उनसे गबन की रकम और पूरे वित्तीय लेनदेन को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस की जांच फिलहाल केवल दोनों गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। मामले में समिति से जुड़े अन्य कर्मचारियों और संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा के मुताबिक जांच के दौरान अगर किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


करीब 3 करोड़ रुपये के इस कथित गबन में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती रकम की बरामदगी है। फिलहाल गबन से जुड़ी राशि बरामद नहीं हो सकी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि समिति की रकम को किन माध्यमों से निकाला गया, किन खातों में उसका लेनदेन हुआ और कथित हेराफेरी से किसे आर्थिक लाभ पहुंचा। जांच में वर्ष 2012 से 2021 तक के रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस लोन खातों, जमा राशि और उनसे संबंधित दस्तावेजों का मिलान कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किए गए और उन्हें वित्तीय रिकॉर्ड में किस तरह इस्तेमाल किया गया। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही गबन की वास्तविक रकम और इसमें शामिल लोगों की संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

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