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गुड़ और नारियल के लालच में पिंजरे में फंसा घायल भालू....

Sep 5
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

बालोद: रानीमाई मंदिर और आसपास के गांवों में पिछले 59 दिनों से घूम रहे घायल भालू को आखिरकार वन विभाग ने पकड़ लिया है। पिछले दाहिने पैर में गंभीर चोट के कारण भालू लंबे समय से तीन पैरों के सहारे चल रहा था। शाम होते ही वह भोजन की तलाश में मंदिर परिसर और आसपास के गांवों तक पहुंच जाता था। भालू की लगातार मौजूदगी के कारण ग्रामीणों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में डर बना हुआ था। वन विभाग ने पिंजरा लगाकर भालू को सुरक्षित पकड़ने में सफलता हासिल की। अब उसे उपचार के लिए जंगल सफारी भेजा गया है।


जानकारी के मुताबिक, घायल भालू को पकड़ने के लिए वन विभाग ने रानीमाई मंदिर के पास पिंजरा लगाया था। भालू को पिंजरे तक आकर्षित करने के लिए अंदर गुड़ और नारियल रखा गया। खाने की खुशबू से आकर्षित होकर भालू पिंजरे के अंदर पहुंच गया। उसके अंदर प्रवेश करते ही वह पिंजरे में फंस गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया। भालू के पिछले दाहिने पैर में गंभीर चोट बताई जा रही है। इसी वजह से वह करीब डेढ़ महीने से तीन पैरों के सहारे चल रहा था। घायल होने के बावजूद भालू लगातार भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहा था।


स्थानीय लोगों के मुताबिक, भालू शाम और रात के समय रानीमाई मंदिर के आसपास दिखाई देता था। वह मंदिर के नजदीक स्थित होटलों तक पहुंच जाता और वहां बचा हुआ खाना तलाशता था। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार भालू होटल में घुसकर भजिया तक खा गया था। एक बार उसने वहां रखी कड़ाही का तेल भी पी लिया था। इतना ही नहीं, मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं द्वारा जलाए जाने वाले दीयों का तेल भी भालू पी जाता था। भोजन की तलाश में लगातार आबादी के करीब आने की उसकी आदत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। रात के समय भालू के दिखाई देने के कारण आसपास रहने वाले ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही थी।


घायल भालू की मौजूदगी पहली बार 16 जुलाई 2026 को सामने आई थी। उस समय सड़क पार करते हुए भालू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में भालू लंगड़ाते हुए सड़क पार करता नजर आया था। उसके पिछले पैर में चोट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग को घायल भालू की जानकारी मिली और उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी। इसके बाद भालू लगातार रानीमाई मंदिर और आसपास के गांवों में देखा जाता रहा। चोट के कारण उसकी सामान्य रूप से जंगल में भोजन तलाशने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका थी और वह आसानी से मिलने वाले भोजन के लिए आबादी की ओर पहुंच रहा था।


वन विभाग के सामने भालू को सुरक्षित पकड़ना महत्वपूर्ण था, क्योंकि घायल होने के कारण उसे उपचार की जरूरत थी। दूसरी तरफ आबादी वाले इलाके में उसकी लगातार आवाजाही से मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बना हुआ था। ऐसे में वन विभाग ने मंदिर के पास पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने की योजना बनाई। करीब 59 दिनों से क्षेत्र में घूम रहे भालू के पकड़े जाने के बाद स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली है। वन विभाग ने घायल भालू को उपचार के लिए जंगल सफारी भेज दिया है, जहां उसके पैर की चोट का इलाज किया जाएगा।

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