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पुरी की ऐतिहासिक रथ यात्रा को UNESCO मान्यता दिलाने की पहल...

Aug 3
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

भुवनेश्वर :- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पुरी की ऐतिहासिक रथ यात्रा को यूनेस्को (UNESCO) की ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ सूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर इस दिशा में आवश्यक समर्थन और पहल करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री का यह कदम श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) की ओर से रथ यात्रा को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ प्रस्ताव सौंपे जाने के बाद सामने आया है। राज्य सरकार का मानना है कि पुरी रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, लोक आस्था और सामुदायिक भागीदारी का एक अनूठा प्रतीक है।


मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने पत्र में रथ यात्रा के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन सदियों से चली आ रही परंपराओं को जीवित रखे हुए है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया में राज्य का सहयोग किया जाए। पुरी रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक यात्रा है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से शामिल होते हैं। यह आयोजन अपनी विशालता, अनूठी परंपराओं और सामाजिक समरसता के लिए प्रसिद्ध है। हर वर्ष आषाढ़ महीने में आयोजित होने वाली इस यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं।


रथ यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भाग लेते हैं। यह आयोजन धार्मिक सीमाओं से आगे बढ़कर सांस्कृतिक एकता और सामूहिक भावना को दर्शाता है। इसी कारण राज्य सरकार इसे यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रही है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इस प्रस्ताव के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार किए हैं, जिनमें रथ यात्रा के इतिहास, परंपराओं, सामाजिक महत्व और इसके संरक्षण से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। प्रस्ताव में यह भी बताया गया है कि किस तरह यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है और आज भी लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।


यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में उन सांस्कृतिक परंपराओं, उत्सवों, कलाओं और ज्ञान प्रणालियों को शामिल किया जाता है, जिनका मानव समाज और संस्कृति के संरक्षण में विशेष योगदान होता है। किसी परंपरा का इस सूची में शामिल होना उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है और उसके संरक्षण के प्रयासों को मजबूती देता है। ओडिशा सरकार का कहना है कि पुरी रथ यात्रा भारतीय संस्कृति की विविधता और आध्यात्मिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। यदि इसे यूनेस्को की सूची में स्थान मिलता है, तो इससे न केवल ओडिशा बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।


मुख्यमंत्री के पत्र के बाद अब केंद्र सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यूनेस्को की प्रक्रिया के तहत किसी भी सांस्कृतिक परंपरा के नामांकन के लिए केंद्र सरकार के माध्यम से प्रस्ताव भेजा जाता है। ऐसे में राज्य सरकार ने केंद्र से आवश्यक सहयोग और समर्थन की मांग की है। राज्य के संस्कृति और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि रथ यात्रा को वैश्विक मंच पर पहचान मिलने से ओडिशा में सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे देश-विदेश के पर्यटकों की रुचि बढ़ सकती है और स्थानीय परंपराओं तथा कलाकारों को भी लाभ मिल सकता है।


पुरी रथ यात्रा सदियों पुरानी परंपरा है और इसे ओडिशा की पहचान से जोड़कर देखा जाता है। इस आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ कला, शिल्प, संगीत और लोक परंपराओं की भी झलक देखने को मिलती है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की पहल के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। यदि पुरी रथ यात्रा को यूनेस्को की ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ सूची में स्थान मिलता है, तो यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

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