मध्य-पूर्व तनाव के बीच भारत का तेल और LNG आयात रिकॉर्ड स्तर पर...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
नई दिल्ली :- मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, समुद्री जहाजों पर हमलों और तेल की आपूर्ति से जुड़े वैश्विक जोखिमों के बीच भारत ने अक्टूबर 2026 में कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात का नया रिकॉर्ड बनाया है। ऊर्जा बाजार का विश्लेषण करने वाली वैश्विक एजेंसी 'केप्लर' (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में भारत का कच्चे तेल का आयात लगभग 56 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुँच गया। वहीं, एलएनजी (LNG) का आयात बढ़कर रिकॉर्ड 27 लाख टन हो गया।
खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध और समुद्री मार्गों पर असुरक्षा के कारण तेल एवं गैस की ढुलाई लगातार महंगी हो रही है। इसके बावजूद, भारतीय रिफाइनरियों और गैस कंपनियों ने देश में ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने के लिए विभिन्न देशों से आयात का दायरा बढ़ाया है। रूस, अंगोला, वेनेजुएला और अमेरिका से कच्चे तेल की खेप पहुँची, जबकि कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से एलएनजी की आपूर्ति में बड़ा उछाल आया है।
अक्टूबर में कितना तेल और गैस आयात हुआ?
कच्चे तेल का दैनिक आयात: लगभग 56.3 लाख बैरल प्रतिदिन (अस्थाई आंकड़े)।
एलएनजी आयात: रिकॉर्ड 27 लाख टन (मासिक)।
आख़िर अक्टूबर में अचानक क्यों बढ़ा तेल का आयात?
भारत में पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (ATF) और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू माँग को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों को लगातार कच्चे तेल की आवश्यकता होती है। अक्टूबर में भारतीय रिफाइनरियां अपनी स्थापित क्षमता के मुकाबले बेहद ऊंचे स्तर पर कार्य कर रही थीं। आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 53.5 लाख बैरल प्रतिदिन की स्थापित रिफाइनिंग क्षमता के मुकाबले सितंबर में करीब 56.2 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का प्रसंस्करण हुआ। यानी कई रिफाइनरियां निर्धारित क्षमता से अधिक उत्पादन कर रही थीं।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर में रिफाइनरियों में रखरखाव के लिए कम बंदी और ईंधन की निरंतर माँग ने आयात बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहती थीं कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश के पेट्रोल पंपों और औद्योगिक उपभोक्ताओं तक ईंधन की आपूर्ति में कोई बाधा न आए।
रूस के साथ अंगोला और वेनेजुएला से बढ़ी खरीदारी
अक्टूबर में रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। रूस से आयात बढ़कर लगभग 19.7 लाख बैरल प्रतिदिन पर पहुँच गया, जो कुल आयात का करीब 35 प्रतिशत था। हालांकि, जुलाई के मुकाबले रूस की हिस्सेदारी में कुछ कमी आई है (जुलाई में यह हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत था)।
इस बीच, भारतीय कंपनियों ने अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों से खरीदारी तेज कर दी है। अंगोला से आयात सितंबर के लगभग 36 हजार बैरल प्रतिदिन से उछलकर अक्टूबर में 3.35 लाख बैरल प्रतिदिन पहुँच गया। वहीं, वेनेजुएला से आयात भी बढ़कर लगभग 3.45 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। अमेरिका और ब्राजील से आने वाले तेल की मात्रा में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इस बदलाव से स्पष्ट है कि भारत अब केवल एक या दो आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी ऊर्जा टोकरी (Energy Basket) को विविधता दे रहा है।
कतर और UAE से LNG आयात में बड़ी छलांग
कच्चे तेल के साथ-साथ भारत में प्राकृतिक गैस की माँग भी तेजी से बढ़ी है। अक्टूबर में एलएनजी का आयात 17.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 27 लाख टन पहुँच गया। इस बढ़ोतरी के पीछे बिजली उत्पादन, उर्वरक (फर्टिलाइज़र) उद्योग और सिटी गैस वितरण नेटवर्क की बढ़ती ज़रूरतें मुख्य वजह रहीं। घरेलू गैस उत्पादन में कमी के चलते आयात पर निर्भरता भी बढ़ी है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात से अतिरिक्त एलएनजी खेप मिलने से भारतीय कंपनियों को अपनी घरेलू ज़रूरतें समय पर पूरी करने में बड़ी मदद मिली।
समुद्री रास्ते खतरनाक, फिर भी कैसे पहुँच रहा तेल?
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और आसपास के समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। लाल सागर और अन्य प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा जोखिम भी बने हुए हैं।
इन कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए भारतीय कंपनियों ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं और समुद्री मार्गों का रुख किया। अक्टूबर में स्वेज नहर के पश्चिमी क्षेत्रों से आने वाले तेल की मात्रा सितंबर के लगभग 6 लाख बैरल प्रतिदिन से दोगुनी होकर करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन पहुँच गई। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया से भारत का कच्चे तेल का आयात सितंबर के लगभग 27 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर अक्टूबर में 23 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इससे साफ है कि पारंपरिक खाड़ी आपूर्ति मार्गों पर दबाव के बावजूद विकल्प तलाश लिए गए हैं।
महंगी ढुलाई बनी नई चुनौती
तेल की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी ढुलाई (Freight Cost) की बढ़ती लागत भी चिंता का विषय है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के पश्चिमी बंदरगाहों से भारत तक 'यूराल क्रूड' पहुँचाने की परिवहन लागत कुछ सौदों में लगभग 30 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक हो गई है, जबकि सितंबर में यह लागत करीब 20 डॉलर प्रति बैरल थी। जहाजों की कमी, सुरक्षा बीमा और लंबे समुद्री रास्तों के कारण मालभाड़ा लगातार बढ़ रहा है, जिससे सस्ते कच्चे तेल के सौदों का लाभ कुछ हद तक कम हो सकता है।
क्या भारत ने अपने रणनीतिक भंडार भर लिए हैं?
अक्टूबर में रिकॉर्ड आयात का यह अर्थ कतई नहीं है कि भारत के सभी रणनीतिक तेल भंडार पूरी तरह भर गए हैं। आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा सीधे रिफाइनरियों में प्रसंस्करण (Processing) के लिए जाता है। इसके अलावा कंपनियां केवल अपने सामान्य परिचालन भंडार (Operational Reserves) ही बनाए रखती हैं।
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व एक अलग व्यवस्था है, जिसका उपयोग गंभीर आपूर्ति संकट के समय किया जाता है। फिलहाल, इस रिकॉर्ड आयात का सबसे बड़ा उद्देश्य घरेलू ईंधन की माँग को पूरा करना, रिफाइनरियों का उत्पादन निर्बाध रखना और युद्ध के बीच आपूर्ति जोखिमों को कम करना है। आने वाले महीनों में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त ऊर्जा उपलब्धता के साथ-साथ इसकी लागत को नियंत्रित रखना होगी। #India #CrudeOil #LNG #EnergyNews #OilImport #GasImport #MiddleEastCrisis #Kpler #RussiaOil #UAE #Qatar #breakingADNnews






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