लॉन्च हुआ देश का पहला AI सैटेलाइट, अब ऑर्बिट में ही होगा डेटा का विश्लेषण....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष तकनीक ने एक नया मील का पत्थर हासिल कर लिया है। अब देश ने अंतरिक्ष अनुसंधान की दुनिया में एक ऐसा कदम बढ़ा दिया है जो आने वाले समय में डेटा प्रोसेसिंग के पूरे समीकरण को बदल कर रख देगा। हैदराबाद स्थित स्पेस-टेक स्टार्टअप 'टेकमीटूस्पेस' (TakeMe2Space) का एमओआई-1ए (MOI-1A) सैटेलाइट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया गया है। यह भारत का अब तक का पहला ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट है, जिसके साथ ही भारत अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन के बाद इस विशिष्ट तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है।
अंतरिक्ष में ही छंटेगा काम का डेटा -
पारंपरिक तौर पर सैटेलाइट्स अंतरिक्ष से विशाल मात्रा में कच्चा डेटा (Raw Data) सीधे धरती पर भेजते हैं, जिसके बाद ग्राउंड स्टेशंस पर उसका विश्लेषण होता है। लेकिन इस नई तकनीक की खूबी यह है कि यह अंतरिक्ष में ही डेटा की छंटनी और प्रोसेसिंग करने में सक्षम है।
कंपनी के सीईओ रौनक कुमार सामंत राय के अनुसार, यदि कोई सैटेलाइट कुल 300 जीबी डेटा जुटाता है, तो उसमें से मुश्किल से 4 या 5 जीबी डेटा ही वास्तविक रूप से उपयोगी होता है। AI तकनीक से लैस यह सैटेलाइट केवल काम की और जरूरी जानकारी को पहचानकर सीधे ग्राउंड स्टेशन पर भेजेगा। इससे भारी-भरकम डेटा ट्रांसफर का समय और लागत दोनों में भारी कमी आएगी।
आपदा प्रबंधन और सुरक्षा में मिलेगी बड़ी मदद -
इस अत्याधुनिक तकनीक का दायरा बहुत व्यापक है, जो कई क्षेत्रों में गेम-चेंजर साबित हो सकता है:
सीमा सुरक्षा: बॉर्डर पर होने वाली गतिविधियों पर अब और अधिक पैनी और त्वरित नजर रखी जा सकेगी।
आपदा प्रबंधन: बाढ़, चक्रवात या जंगलों में लगने वाली आग के समय सैटेलाइट तुरंत लाइव तस्वीरों का विश्लेषण कर यह बता देगा कि संकट कितना गंभीर है।
कृषि और पर्यावरण: फसलों के स्वास्थ्य की निगरानी, खनन क्षेत्रों की मैपिंग और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में यह क्रांतिकारी साबित होगा।
2028 तक अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की तैयारी -
यह तो महज एक शुरुआत है। 'टेकमीटूस्पेस' ने अपने दूरदर्शी प्रोजेक्ट के तहत वर्ष 2028 तक अंतरिक्ष में ही एक स्पेस-आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है। इसके तहत लगभग 100 किलोग्राम वजन वाले उच्च क्षमता वाले सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे, जिनमें мощदार ग्राफिक्स प्रोसेसर और लगभग 100 टेराबाइट तक का स्टोरेज होगा। कई सैटेलाइट्स का यह नेटवर्क अंतरिक्ष में ही क्लाउड कंप्यूटिंग जैसा माहौल तैयार करेगा।
इस तकनीक के साथ भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता और इनोवेशन का एक और शानदार उदाहरण पेश किया है।






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