google.com, pub-3310156774694367, DIRECT, f08c47fec0942fa0
top of page
WhatsApp Image 2025-09-10 at 15.54_edite
ADN FILMS POSTER

BREAKING ADN NEWS

WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-08 at 12.10.10.jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (2).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.31 (1).jpeg
WhatsApp Image 2026-09-19 at 09.46.30 (1).jpeg

भारत ने शिपबिल्डिंग के लिए 69,725 करोड़ मंजूर-ग्लोबल मार्केट पर दावेदारी मजबूत....

Jul 25
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली: भारत के जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) उद्योग को मजबूत बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने देश के समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के व्यापक पैकेज को मंजूरी दी है। इस पैकेज का उद्देश्य घरेलू शिपयार्ड को आर्थिक मजबूती देना, जहाज निर्माण की लागत को कम करना, लंबे समय तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना और इस क्षेत्र में रोजगार एवं कौशल विकास को बढ़ावा देना है।


लोकसभा में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने भारतीय जहाज निर्माण उद्योग को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थान दिलाने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इस पैकेज के जरिए देश में जहाज निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। इस पैकेज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 24,736 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम है। इस योजना के तहत भारतीय शिपयार्ड को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के जहाज निर्माण केंद्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय शिपयार्ड की उत्पादन लागत कम हो और उन्हें वैश्विक ऑर्डर हासिल करने में मदद मिले।


केंद्र सरकार ने 25,000 करोड़ रुपये के मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड को भी मंजूरी दी है। इस फंड का उद्देश्य समुद्री क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इसके तहत 20,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड और 5,000 करोड़ रुपये का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड शामिल है। मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड के माध्यम से जहाज निर्माण, समुद्री परिवहन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं, इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड के जरिए उद्योगों को ऋण पर ब्याज से जुड़ी राहत देने की योजना है, जिससे कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम होगा और वे नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।


सरकार का मानना है कि भारत के पास लंबा समुद्री तट और विशाल समुद्री व्यापार क्षमता है। इसके बावजूद देश का शिपबिल्डिंग क्षेत्र अभी भी कई विकसित देशों की तुलना में पीछे है। इस पैकेज के जरिए सरकार घरेलू क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी निर्भरता कम करना चाहती है। इस योजना से छोटे और बड़े दोनों स्तर के शिपयार्ड को लाभ मिलने की उम्मीद है। जहाज निर्माण उद्योग से जुड़े इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइनिंग और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।


केंद्र सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान और समुद्री क्षेत्र के विकास की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार लगातार बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, समुद्री व्यापार को बढ़ाने और भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिपबिल्डिंग उद्योग में निवेश बढ़ने से भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेगा, बल्कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है। इससे देश में तकनीकी विकास, औद्योगिक उत्पादन और रोजगार के क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार द्वारा मंजूर किया गया 69,725 करोड़ रुपये का यह पैकेज भारतीय समुद्री उद्योग के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इससे देश के जहाज निर्माण क्षेत्र को नई दिशा मिलने और भारत के वैश्विक समुद्री क्षेत्र में मजबूत भूमिका निभाने की उम्मीद है।

Comments


© 2018 by Anis lala dani. Proudly created with breakingadnnews.com

  • Subscribe Channale
bottom of page
naver-site-verification: navere8d42c0359e3e135363406d5b6093c27.html