हाईकोर्ट से भू-माफिया राज कुमार भिखवानी को बड़ा झटका, दांडिक याचिका खारिज....

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-
रायपुर। तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के बहुचर्चित भूमि विवाद मामले में राज कुमार भिखवानी को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मामले में दायर दांडिक प्रकरण याचिका CRMP क्रमांक 2154/2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने 17 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास के समक्ष हुई। हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध सामग्री का परीक्षण संबंधित न्यायालय द्वारा कानून के अनुसार किया जाना है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले का गुण-दोष के आधार पर निराकरण किया जाए। साथ ही, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी ओर से की गई टिप्पणियों से विचारण न्यायालय प्रभावित नहीं होगा और वह मामले पर स्वतंत्र रूप से निर्णय करेगा।
खात्मा रिपोर्ट को लेकर पहले से चल रहा विवाद
यह मामला तिल्दा विकासखंड के ग्राम पंचायत तुलसी की भूमि से जुड़े विवाद से संबंधित है। शिकायतकर्ता एवं अधिवक्ता केशव शरण वैष्णव की ओर से आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि को लेकर कथित फर्जीवाड़ा एवं प्लॉटिंग कर बिक्री की गई। पुलिस जांच के बाद मामले में खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसे लेकर शिकायतकर्ता पक्ष ने न्यायालय का रुख किया।शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले में उपलब्ध सीमांकन प्रतिवेदन, राजस्व अभिलेख, भूमि संबंधी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया। इसी आधार पर खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने पर आपत्ति जताई गई। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, खात्मा रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण प्रस्तुत किया गया। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, रायपुर, जितेन्द्र कुमार सिंह के समक्ष हुई कार्यवाही में उपलब्ध दस्तावेजों एवं तथ्यों के पुनः परीक्षण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पूर्व आदेश को निरस्त कर प्रकरण को विधि के अनुसार आगे विचार के लिए भेजा गया।
सत्र न्यायालय के आदेश को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
सत्र न्यायालय के उक्त आदेश को चुनौती देते हुए राज कुमार भिखवानी की ओर से हाईकोर्ट में दांडिक याचिका दायर की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने CRMP 2154/2026 को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर संबंधित न्यायालय द्वारा आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश का अर्थ आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध किया जाना नहीं है। आरोपों की सत्यता और मामले का अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निर्धारित होगा।
एसपी स्तर की जांच रिपोर्ट का भी शिकायतकर्ता पक्ष ने दिया हवाला
शिकायतकर्ता पक्ष ने पुलिस अधीक्षक स्तर पर हुई जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि जांच में शिकायत के एक प्रमुख बिंदु को प्रथम दृष्टया प्रमाणित माना गया था। हालांकि, जांच रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों तथा लगाए गए आरोपों का अंतिम मूल्यांकन न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना है।
एसडीएम के निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, एसडीएम तिल्दा-नेवरा द्वारा संबंधित प्रकरण में कार्रवाई के लिए थाना तिल्दा-नेवरा को निर्देश दिए गए थे। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि इसके बावजूद संबंधित धाराओं के तहत अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता पक्ष ने राज कुमार भिखवानी, सुरेश भिखवानी, दिव्या तनेजा और सुभाष टंडन उर्फ सुभाषिनी साहू सहित अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए हैं। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में प्रस्तुत एवं परीक्षण किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। हाईकोर्ट द्वारा दांडिक याचिका खारिज किए जाने के बाद मामले में संबंधित न्यायालय के समक्ष उपलब्ध सामग्री और साक्ष्यों के आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही का मार्ग खुला है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि विचारण न्यायालय मामले का निर्णय गुण-दोष के आधार पर स्वतंत्र रूप से करेगा और हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेगा। प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज परांजपे तथा केशव वैष्णव की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार यादव उपस्थित रहे।






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