देह व्यापार मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अपनी मर्जी से जिस्मफरोशी अपराध नहीं, तीन महिलाएं बरी....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल अपनी मर्जी से देह व्यापार में शामिल होना अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 4 के दायरे में अपराध नहीं है। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ छत्तीसगढ़ शासन की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें तीन महिलाओं को सजा दिलाने की मांग की गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि साल 2013 की है, जब कोरबा के महाराणा प्रताप नगर स्थित एक मकान में पुलिस ने दबिश दी थी। इस कार्रवाई के दौरान कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था। निचली अदालत ने अन्य आरोपों से राहत देते हुए इन तीनों महिलाओं को धारा 4 के तहत दोषी ठहराया था और वर्ष 2014 में इन्हें दो साल की कैद व जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने महिलाओं को इस धारा से बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटया था।
जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि धारा 4 के तहत सजा तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक यह साबित न हो कि आरोपी किसी अन्य व्यक्ति के देह व्यापार की कमाई पर आश्रित था। चूंकि इस प्रकरण में ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया कि महिलाएं किसी अन्य की कमाई पर जी रही थीं या दलाली कर रही थी, लिहाजा अदालत ने शासन की अपील खारिज करते हुए महिलाओं को पूरी तरह बरी कर दिया।






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