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डीपीआर प्रक्रिया तेज करने के निर्देश, मल्टीस्पेशयलिटी अस्पताल में देरी पर हाई कोर्ट सख्त...

Aug 22
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

प्रयागराज :- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित अत्यंत आवश्यक मल्टीस्पेशयलिटी अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आम जनता से सीधे जुड़े इतने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रोजेक्ट को सरकारी आदेशों और नौकरशाही की औपचारिकताओं के कारण लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रमुख सचिव (नियोजन विकास) को व्यक्तिगत रूप से मामले पर ध्यान देने और अस्पताल निर्माण से संबंधित डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया को छोटा कर तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।


छह महीने की प्रक्रिया पर कोर्ट ने जताई नाराजगी अदालत के समक्ष प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया था कि आवास खाली होने के बाद डीपीआर की मंजूरी और ठेकेदार के चयन की प्रक्रिया पूरी करने में करीब छह महीने लगने का अनुमान है। इसी समय-सीमा पर हाई कोर्ट ने गंभीर आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि प्रयागराज जैसे बड़े शहर और आसपास के क्षेत्रों को इस तरह के अत्याधुनिक अस्पताल की तत्काल आवश्यकता है। ऐसे में परियोजना की मंजूरी और निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया को छह महीने तक खींचना उचित नहीं है।


अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अनावश्यक प्रक्रियात्मक देरी से बचें और प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने परियोजना की सार्वजनिक उपयोगिता को विशेष महत्व दिया। प्रयागराज न केवल एक प्रमुख शहर है, बल्कि आसपास के कई जिलों के लोग भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए यहां पहुंचते हैं। गंभीर बीमारियों और जटिल चिकित्सा मामलों में मरीजों को विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे में मल्टीस्पेशयलिटी अस्पताल की स्थापना से क्षेत्र के लोगों को एक ही स्थान पर विभिन्न विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होने की उम्मीद है।


अदालत ने इसी जनहित को ध्यान में रखते हुए परियोजना में तेजी लाने पर जोर दिया। पीठ का संदेश स्पष्ट था कि स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं में प्रशासनिक प्रक्रियाएं जनहित पर हावी नहीं होनी चाहिए। अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से निगरानी के निर्देश हाई कोर्ट ने प्रमुख सचिव (नियोजन विकास) को स्वयं मामले की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत चाहती है कि डीपीआर तैयार करने से लेकर उसकी मंजूरी और आगे की प्रक्रिया में अनावश्यक समय न लगे।


अदालत के निर्देश के बाद संबंधित विभागों के सामने अब परियोजना की प्रक्रिया को निर्धारित औपचारिकताओं के भीतर अधिक तेजी से पूरा करने की चुनौती है। डीपीआर किसी भी बड़े निर्माण प्रोजेक्ट की आधारभूत दस्तावेज होती है। इसमें परियोजना की तकनीकी जरूरतों, अनुमानित लागत, निर्माण योजना और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का विवरण होता है। इसके आधार पर आगे की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरियां दी जाती हैं। आवास खाली होने के बाद शुरू होनी है प्रक्रिया अदालत को बताया गया कि अस्पताल परियोजना से संबंधित आगे की प्रक्रिया आवास खाली होने के बाद आगे बढ़ाई जानी है। इसके बाद डीपीआर की मंजूरी और ठेकेदार के चयन सहित अन्य आवश्यक चरण पूरे किए जाने हैं। सरकारी पक्ष की ओर से इन प्रक्रियाओं में करीब छह महीने लगने का अनुमान बताया गया था।


अदालत ने इस समय-सीमा को देखते हुए स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़ी परियोजना के लिए इतनी लंबी अवधि उचित नहीं मानी जा सकती। पीठ ने अधिकारियों से प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाने की अपेक्षा की है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बढ़ती जरूरत प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ती आबादी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की मांग को देखते हुए बड़े अस्पताल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। गंभीर रोगों के इलाज के लिए मरीजों और उनके परिजनों को कई बार दूसरे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। मल्टीस्पेशयलिटी अस्पताल शुरू होने के बाद मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे उपचार के लिए दूर जाने की मजबूरी कम होने के साथ-साथ समय और खर्च दोनों बचने की उम्मीद है।


इसी वजह से अदालत ने इस परियोजना को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया की तरह नहीं, बल्कि व्यापक जनहित से जुड़े प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अगली सुनवाई में प्रगति पर नजर अब इस मामले में अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी। इस दौरान अदालत यह जानना चाहेगी कि उसके निर्देशों के बाद संबंधित विभाग ने परियोजना को गति देने के लिए क्या कदम उठाए हैं। प्रमुख सचिव (नियोजन विकास) को मामले पर व्यक्तिगत ध्यान देने के निर्देश दिए जाने के बाद उम्मीद है कि डीपीआर तैयार करने और मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी आएगी।


हाई कोर्ट की नाराजगी के बाद अब परियोजना से जुड़े विभागों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। अदालत ने जिस तरह छह महीने की प्रस्तावित अवधि को अस्वीकार्य माना है, उससे साफ है कि वह अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। फिलहाल सभी की नजर 1 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जहां परियोजना की प्रगति और डीपीआर प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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