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महासमुंद जिले में झमाझम बारिश, किसानों के चेहरे खिले.....

Jul 31
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

महासमुंद जिले में इस वर्ष मानसून लगातार सक्रिय बना हुआ है और इसका असर जिलेभर में दर्ज की जा रही अच्छी वर्षा के रूप में दिखाई दे रहा है। 01 जून 2026 से शुरू हुए मानसून सीजन के दौरान अब तक महासमुंद जिले में 724.7 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। लगातार हो रही बारिश से किसानों के चेहरों पर खुशी है, वहीं जलाशयों, तालाबों और नदियों में भी जलस्तर बढ़ने लगा है। अच्छी वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुआई और फसल विकास को भी पर्याप्त लाभ मिल रहा है। प्रशासन लगातार वर्षा की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संबंधित विभागों को आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।


भू-अभिलेख विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले की सभी तहसीलों में अलग-अलग मात्रा में वर्षा दर्ज की गई है। इस बार सबसे अधिक औसत वर्षा पिथौरा तहसील में 917.3 मिलीमीटर रिकॉर्ड की गई है, जिससे यह जिले की सबसे अधिक वर्षा वाली तहसील बन गई है। इसके बाद सरायपाली में 914.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो पिथौरा से बहुत कम अंतर पर रही। वहीं बसना तहसील में अब तक 777.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई है। दूसरी ओर बागबाहरा में 591.9 मिलीमीटर, कोमाखान में 576.3 मिलीमीटर तथा महासमुंद तहसील में 571.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो जिले में सबसे कम रही। हालांकि सभी क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं और आने वाले दिनों में वर्षा के आंकड़ों में और वृद्धि होने की संभावना है।


31 जुलाई 2026 को भी जिले में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहा। इस दिन पूरे जिले में 4.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। तहसीलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महासमुंद तहसील में सबसे अधिक 5.9 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके बाद सरायपाली में 4.9 मिलीमीटर, बागबाहरा में 4.1 मिलीमीटर, बसना में 4.0 मिलीमीटर, पिथौरा में 3.7 मिलीमीटर तथा कोमाखान में 2.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यह बारिश खेती-किसानी के लिए लाभकारी मानी जा रही है और खेतों में नमी बनाए रखने में मदद कर रही है।


कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक हुई वर्षा खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों जैसे धान, मक्का और अन्य वर्षा आधारित फसलों के लिए अनुकूल साबित हो रही है। पर्याप्त वर्षा से सिंचाई पर निर्भरता कम होगी और किसानों को बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। साथ ही भूजल स्तर में सुधार, जलाशयों के भरने और पेयजल उपलब्धता पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। जिला प्रशासन ने लोगों से बारिश के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने, जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने तथा मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। यदि मानसून की यही रफ्तार बनी रही तो जिले में कृषि उत्पादन के साथ-साथ जल संरक्षण की स्थिति भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

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