शारदीय नवरात्रि का भव्य शुभारंभ: बसना में विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने जलाई अखंड जोत और बोए जवारे....
मां समलेश्वरी और श्रीराम-जानकी मंदिर में विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने की विशेष पूजा, कहा- मां शैलपुत्री का तप जीवन में धर्म और कर्म का मार्ग दिखाता है....
बसना अंचल में भक्तिमय माहौल: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने टेका माथा...
शक्ति और आस्था के पर्व पर विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने की आदिशक्ति की आराधना, क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना...
अन्याय और अहंकार के नाश का संदेश देता है देवी अनुष्ठान: विधायक डॉ. संपत अग्रवाल...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
बसना। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर पूरे क्षेत्र में शारदीय नवरात्रि की आध्यात्मिक और उल्लासपूर्ण बयार बह रही है। सनातन संस्कृति और शक्ति उपासना के इस महापर्व के पहले दिन क्षेत्रीय विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने नगर के प्रसिद्ध मां समलेश्वरी मंदिर और प्राचीन श्रीराम-जानकी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां के दरबार में अखंड मनोकामना ज्योति प्रज्वलित की और समृद्धि के प्रतीक पवित्र जवारे बोए। इस दौरान उन्होंने बसना विधानसभा क्षेत्र सहित संपूर्ण प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना की।
मंदिर परिसर में शंखध्वनि, घंटा-घड़ियाल और दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के बीच विधायक डॉ. अग्रवाल ने देवी स्वरूपा मां समलेश्वरी की षोडशोपचार पूजा की। इसके बाद उन्होंने श्रीराम-जानकी मंदिर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता सीता के चरणों में नमन कर क्षेत्र के निरंतर विकास और खुशहाली का आशीर्वाद मांगा।
क्षेत्रवासियों को नवरात्रि की हार्दिक बधाई देते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि शारदीय नवरात्रि केवल नौ दिनों का पर्व नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि, कठिन तपस्या और आत्मचेतना को जाग्रत करने का अवसर है। पहले दिन हम मां शैलपुत्री की आराधना करते हैं, जो दृढ़ संकल्प की साक्षात प्रतिमूर्ति हैं। उनका पावन स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, व्यक्ति को हमेशा धर्म, सत्य और जनसेवा के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए।
पूजा-संपन्न होने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने कहा कि सनातन परंपरा में शक्ति को संपूर्ण सृष्टि का मूल आधार माना गया है। नवरात्रि का यह अनुष्ठान हमें याद दिलाता है कि जब-जब समाज में अहंकार और आसुरी वृत्तियां बढ़ती हैं, तब-तब मां भगवती धर्म की पुनर्स्थापना करती हैं। आज के समय में इस पर्व का संदेश यही है कि हम समाज में मातृशक्ति का सम्मान करें, बेटियों को सशक्त बनाएं और सामाजिक समरसता के साथ आगे बढ़ें। जनसेवा ही हमारे लिए सच्ची देवी आराधना है और हम जनता के विश्वास पर खरा उतरने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।
इस पावन अवसर पर विभिन्न मंदिर समितियों के पदाधिकारी, पुरोहितगण, वरिष्ठ नागरिक, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरा क्षेत्र 'जय माता दी' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा।






.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)
.jpg)




Comments