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सरकार की दुर्भावना से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है - कांग्रेस...

Aug 21
2 min read
  • जंगली जानवरों के हमलों से बढ़े मौत के आंकड़े: सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-

रायपुर :- मानव वन्यजीव संघर्ष के चलते मौत के बढ़ते आंकड़ों के लिए सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जंगली जानवरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं, कल पखांजूर के परलकोट में बाघ के हमले से एक ग्रामीण की मौत हुई, कल ही सूरजपूर जिले के प्रतापपुर वन क्षेत्र के सरहरी बाजार से सिंघरा लौट रहे 48 वर्षीय ग्रामीण को हाथी ने कुचल कर मार दिया, विगत दिनों कांकेर के मरकाटोला में भालू ने 3-3 लोगों की जानें ली थी। इन घटनाओं का प्रमुख कारण जंगलों की अंधाधुंध कटाई और खनिजों के असंतुलित दोहन है। मौत के आंकड़े दोनों तरफ बढ़ रहे हैं, कांकेर में भालू की भी मौत हो गई, अनेकों वन्यजीव भी मारे गए हैं।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता में केवल संसाधनों की लूट है, न इंसानो की चिंता है, न वन्यजीव। प्राकृति और पर्यावरण भी इस सरकार में गंभीर संकट में हैं। डबल इंजन की सरकार में छत्तीसगढ़ के जंगलों में बड़े पैमाने पर हो रही कटाई, खनन और सत्ता के संरक्षण में इंसानी दखल के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास लगातार सिमट रहा है।


रहने की जगह और भोजन की कमी के चलते जानवर रिहायशी इलाकों की तरफ आ रहे हैं, जिससे हिंसक घटनाओं, फसलों को नुकसान और मानव-वन्यजीव संघर्ष में भारी वृद्धि हुई है। विगत ढ़ाई वर्ष के भाजपा सरकार में जंगली जानवरों के हमले से 230 से अधिक लोगों की मौत हुई है, घायलों की संख्या हजारों में है, वहीं इसी समयावधि में 9 बाघों, 38 हाथियों सहित कुल 562 जंगली जानवरों की अस्वाभाविक मौत दर्ज की गई है जिसके लिए केवल इस सरकार की कॉर्पाेरेट परस्त नीतियां जिम्मेदार है।


प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वनों की दुर्दशा और वन्यजीवों के हिंसक होने के प्रमुख कारण सरकार के पूंजीपति मित्रो द्वारा संसाधनों के असंतुलित दोहन के लिए पर्यावास का नष्ट किया जाना है। राज्य के विभिन्न हिस्सों बस्तर, सरगुजा, हसदेव अरण्य और अन्य क्षेत्रों में अंधाधुंध पेड़ कटाई और खनन परियोजनाओं से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास छिन रहा है। भोजन की तलाश में ये जानवर गांवों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।

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