बर्खास्तगी के बाद संत बने गिरवर सिंह तोमर को मिली दोबारा वर्दी....
- ANIS LALA DANI

- 1 day ago
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ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
भोपाल: मध्य प्रदेश के मुरैना के गिरवर सिंह तोमर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, एक वक्त सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की वर्दी पहनकर देश की सेवा करने वाले गिरवर सिंह को विभागीय कार्रवाई के बाद नौकरी गंवानी पड़ी | इसके बाद उन्होंने मंदिर में संत का जीवन अपना लिया, लेकिन वर्दी वापस पाने की उम्मीद कभी नहीं छोड़ी |करीब ढाई दशक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उनका संघर्ष रंग लाया और अब वे दोबारा CRPF की वर्दी में नजर आ रहे हैं | जानकारी के अनुसार मुरैना के छिछावली गांव के रहने वाले गिरवर सिंह तोमर ने 1991 में CRPF में हवलदार के तौर पर सेवा शुरू की थी | करीब आठ साल तक नौकरी करने के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद हुआ, इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच चली और 1999 में उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया | नौकरी छूटने के बाद गिरवर सिंह वापस मुरैना लौटे, लेकिन जिंदगी ने उन्हें एक बिल्कुल अलग राह पर पहुंचा दिया | उन्होंने मंदिर में रहकर पूजा-पाठ और साधना शुरू कर दी | बाद में गुफा मंदिर पहुंचे, जहां वे गिरवर दास महाराज के नाम से संत के रूप में पहचाने जाने लगे | हालांकि, जीवन की दिशा बदल गई थी, लेकिन पुरानी नौकरी को लेकर उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई, 1999 में उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, करीब आठ साल बाद 2007 में उनके पक्ष में फैसला आया, लेकिन CRPF की ओर से इस फैसले पर स्टे ले लिया गया | इसके बाद मामला दोबारा लंबी कानूनी प्रक्रिया में चला गया, फिर गिरवर सिंह ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की | वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए नौकरी बहाल करने का आदेश दिया | आदेश के बावजूद जब उन्हें तत्काल सेवा में नहीं लिया गया तो उन्होंने अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजकर अपनी नियुक्ति की मांग जारी रखी | आखिरकार अगस्त 2026 में वह दिन आया जिसका इंतजार गिरवर सिंह ने 26 साल तक किया था | उनकी CRPF में वापसी हुई और उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तैनाती मिली | आदेश मिलते ही उन्होंने वहां पहुंचकर ड्यूटी ज्वाइन की और फिर से वही वर्दी पहन ली, जिसे पाने के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा संघर्ष में गुजार दिया | इस दौरान गिरवर दास महाराज करीब दो दशक तक मंदिर सेवा से जुड़े रहे |




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