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आधुनिक खेती से समृद्ध होते किसान: ग्राम सिरौली के राममिलन सिंह ने नैनो डीएपी अपनाकर पेश की प्रेरणादायक मिसाल.....

Aug 5
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

भरतपुर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के किसान अब कम लागत में अधिक उत्पादन की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम सिरौली निवासी किसान राममिलन सिंह ने खरीफ सीजन में इफको नैनो डीएपी का उपयोग कर संतुलित पोषण आधारित खेती की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। इस खरीफ सीजन में राममिलन सिंह ने अपनी फसल की बुवाई के लिए आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, चौनपुर (शाखा मनेन्द्रगढ़) से आवश्यक कृषि आदान प्राप्त किए। समिति द्वारा उन्हें इफको नैनो डीएपी, यूरिया तथा एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) समय पर उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्होंने निर्धारित समय पर बुवाई का कार्य पूरा किया।


राममिलन सिंह बताते हैं कि पहले पारंपरिक उर्वरकों के अधिक उपयोग के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी। कृषि विभाग एवं सहकारी समिति के मार्गदर्शन में इस बार उन्होंने नैनो डीएपी का उपयोग किया, जिससे उर्वरकों का संतुलित एवं वैज्ञानिक ढंग से प्रयोग संभव हुआ। इसका परिणाम यह रहा कि खेती की लागत कम हुई और फसल को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रभावी रूप से उपलब्ध हो रहे हैं। उनका कहना है कि नैनो डीएपी का छिड़काव करना बेहद आसान है तथा इसकी कम मात्रा में ही बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं। इसके उपयोग से पौधों की बढ़वार अच्छी हो रही है, जड़ों का विकास मजबूत हुआ है और फसल पहले की अपेक्षा अधिक हरी-भरी एवं स्वस्थ दिखाई दे रही है। उन्हें विश्वास है कि इस सीजन में उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।


कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इफको नैनो डीएपी आधुनिक कृषि की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो पौधों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता को अधिक प्रभावी बनाती है। इसके उपयोग से पारंपरिक उर्वरकों की खपत कम होती है, खेती की लागत घटती है, पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। नैनो डीएपी जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर जिले के किसान न केवल अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, बल्कि टिकाऊ एवं वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा दे रहे हैं। किसान राममिलन सिंह की यह पहल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है कि नई तकनीकों को अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।



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