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किसानों ने की पानी निकासी की मांग, जलभराव से फसल खतरे में...

Aug 18
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

झज्जर :- गांव ढराणा और आसपास के कृषि क्षेत्रों में बरसात के पानी की उचित निकासी नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। लगातार जलभराव के कारण सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं। खेतों में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र ढराणा से दुबलधन रोड और ढराणा से चिमनी रोड के आसपास के कृषि क्षेत्र बताए जा रहे हैं। यहां बारिश का पानी खेतों में जमा हो गया है, जिससे किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही पानी की निकासी नहीं की गई तो मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो सकती हैं।


स्थानीय लोगों के अनुसार, बरसात के मौसम में हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है, लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है। खेतों में कई दिनों से पानी भरा हुआ है, जिसके कारण फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। कई जगहों पर फसलें गलने लगी हैं और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। मामले को लेकर कैप्टन सुरेंद्र अहलावत ने बताया कि गांव में ड्रेन नंबर 8 पर जल निकासी के लिए संप बनाया गया है, लेकिन उसमें मोटर पंप की व्यवस्था नहीं की गई है। मोटर पंप नहीं होने के कारण खेतों में जमा पानी को बाहर नहीं निकाला जा पा रहा है।


उन्होंने कहा कि यदि संप पर जल्द मोटर पंप लगाया जाए तो खेतों में जमा पानी की निकासी की जा सकती है और किसानों को राहत मिल सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। किसानों का कहना है कि बरसात के पानी की निकासी के लिए बनाए गए इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। ड्रेन और जल निकासी व्यवस्था होने के बावजूद पानी खेतों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। इससे साफ है कि व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है।


ग्रामीणों ने बताया कि जलभराव के कारण खेती करना मुश्किल हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें लंबे समय तक पानी में डूबी रहने से खराब हो सकती हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने में बीज, खाद, दवाइयों और मेहनत पर काफी खर्च किया है। यदि समय रहते पानी नहीं निकाला गया तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द मौके का निरीक्षण करने और पानी निकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल अस्थायी समाधान से काम नहीं चलेगा, बल्कि भविष्य में जलभराव की समस्या से बचने के लिए स्थायी योजना बनानी होगी।


विशेषज्ञों के अनुसार, खेतों में अधिक समय तक पानी जमा रहने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है। खासकर धान के अलावा अन्य फसलों के लिए जलभराव काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर जल प्रबंधन की जरूरत है। नालों की सफाई, ड्रेनों की क्षमता बढ़ाने और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फिलहाल किसान प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।


उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है। किसानों ने मांग की है कि ड्रेन नंबर 8 पर तुरंत मोटर पंप लगाया जाए और खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था की जाए। जलभराव की इस समस्या ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर जल निकासी व्यवस्था की जरूरत को उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की परेशानी को देखते हुए कितनी जल्दी कदम उठाता है।

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