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कृषक‑महिला सशक्तिकरण - महासमुंद बना दुग्ध उत्पादन का नया केंद्र....

Jul 14
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ -

छत्तीसगढ़ का महासमुंद जिला अब दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बना रहा है। डेयरी व्यवसाय से जुड़कर जिले के हजारों किसान और ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।


वर्तमान में जिले में 15 हजार से अधिक किसान और महिलाएं डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और इसे अपनी नियमित आय का प्रमुख साधन बना चुके हैं। जिले में प्रतिदिन 39 हजार लीटर से अधिक दूध का संग्रहण किया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को लगातार आर्थिक लाभ मिल रहा है।


गाय पालन से महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का रास्ता

महासमुंद जिले के कई गांवों में पशुपालन महिलाओं की आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रहा है। बागबाहरा विकासखंड के ग्राम जोरातराई की महिला पशुपालक भगवती ध्रुव को पशुधन विकास विभाग की ओर से शत-प्रतिशत अनुदान पर गिर और साहीवाल नस्ल की गाय उपलब्ध कराई गई।


इन गायों से -

  • दोनों गाय लगभग 10-10 लीटर दूध देती हैं।

  • परिवार की जरूरत के लिए दूध रखा जाता है।

  • अतिरिक्त दूध दुग्ध सहकारी समिति में बेचकर आय प्राप्त की जाती है।

भगवती ध्रुव के अनुसार, डेयरी व्यवसाय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और नियमित आमदनी का साधन मिला है।

इसी तरह ग्राम जोरातराई की जया बाई ध्रुव को भी अनुदान के माध्यम से गिर नस्ल की दो गाय मिलीं। वह दूध का उपयोग घरेलू जरूरतों के लिए करने के साथ बाकी दूध समिति में बेचती हैं।


गांवों में बनी दुग्ध सहकारी समितियां-

जोरातराई गांव में दुग्ध उत्पादन बढ़ने के बाद वर्ष 2021 में दुग्ध सहकारी समिति का गठन किया गया।

इस समिति में आसपास के कई गांवों से दूध पहुंचता है -

  • सम्हर

  • बिराजपाली

  • कौहाकुड़ा

  • मुड़ागांव

  • मोंगरापाली

  • लमकेनी

  • कोटनपाली

  • सरायपाली

समिति से एकत्र दूध को बीएमसी कौहाकुड़ा भेजा जाता है, जहां से प्रक्रिया पूरी कर इसे देवभोग रायपुर पहुंचाया जाता है।


रोजाना हजारों लीटर दूध का संग्रहण-

महासमुंद जिले के पांचों विकासखंडों में दुग्ध उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है।

जिले की उपलब्धियां

  • 15 हजार से अधिक किसान और ग्रामीण परिवार जुड़े।

  • प्रतिदिन 39 हजार लीटर से अधिक दूध संग्रहित।

  • 156 दुग्ध सहकारी समितियां सक्रिय।

  • किसानों को नियमित आय का स्रोत मिला।

दूध महासंघ देवभोग के माध्यम से जिले की दुग्ध सहकारी समितियां किसानों से दूध खरीद रही हैं।


महिलाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण और सहयोग-

पशुधन विकास विभाग की ओर से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्राम जोरातराई में स्वयं सहायता समूह की 19 महिलाओं को शत-प्रतिशत अनुदान पर डेयरी इकाइयां स्थापित कराई गईं।

महिलाओं को दिया गया—

  • आधुनिक पशुपालन प्रशिक्षण।

  • डेयरी प्रबंधन की जानकारी।

  • वैज्ञानिक तरीके से पशु देखभाल का प्रशिक्षण।

  • सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन भ्रमण।

इन प्रयासों का परिणाम है कि गांव की महिलाएं अब डेयरी व्यवसाय के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं।

पशुओं की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने पर जोर

पशुधन विकास विभाग द्वारा दूध उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • पशुओं का नियमित टीकाकरण।

  • नस्ल सुधार कार्यक्रम।

  • सेक्स सॉर्टेड सीमेन तकनीक।

  • पौष्टिक पशु आहार की उपलब्धता।

इन प्रयासों से पशुओं की उत्पादक क्षमता में सुधार हो रहा है और किसानों को अधिक लाभ मिल रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती -

डेयरी व्यवसाय ने महासमुंद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा किए हैं। विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह व्यवसाय आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रहा है।

अब पशुपालक केवल खेती पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि दूध उत्पादन से उन्हें हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है।

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