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छत्तीसगढ़ बीज निगम में डेटा एंट्री ऑपरेटर पद का फर्जी जॉइनिंग लेटर वायरल....

Sep 2
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड में नौकरी लगाने के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। किसी अज्ञात व्यक्ति या संस्था ने निगम के महाप्रबंधक विनोद कुमार वर्मा के हस्ताक्षर को स्कैन कर फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार कर दिया। इस फर्जी आदेश में एक युवक को कसडोल, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। मामला सामने आने के बाद महाप्रबंधक ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


वाट्सएप पर पहुंचा फर्जी नियुक्ति आदेश

पुलिस के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के बीज भवन, तेलीबांधा में पदस्थ महाप्रबंधक विनोद कुमार वर्मा के मोबाइल पर 29 अगस्त की रात करीब 9:30 बजे एक व्यक्ति का वाट्सएप मैसेज आया। मैसेज के साथ एक नियुक्ति पत्र की फोटो भेजी गई थी। बाद में शेखर वर्मा ने भी फोन कर इस नियुक्ति आदेश के संबंध में जानकारी ली और पूछा कि क्या यह आदेश उनके द्वारा जारी किया गया है। महाप्रबंधक ने जब नियुक्ति पत्र देखा तो उनके होश उड़ गए। पत्र पर उनके हस्ताक्षर थे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आदेश उनके द्वारा जारी नहीं किया गया है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि उनके हस्ताक्षर को स्कैन कर फर्जी नियुक्ति पत्र पर लगाया गया है।


हेमंत साहू के नाम से बनाया गया आदेश

फर्जी नियुक्ति पत्र हेमंत साहू के नाम से तैयार किया गया था। इसमें उसे छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किए जाने की बात लिखी गई थी। पत्र में उसका पता हांडापारा, कसडोल, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा बताया गया था। फर्जी आदेश में दावा किया गया था कि संबंधित व्यक्ति को 6 जुलाई 2026 से जिला बलौदाबाजार-भाटापारा स्थित कसडोल कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किया जा रहा है। नियुक्ति के संबंध में कुछ नियम और शर्तों का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि, महाप्रबंधक ने पुलिस को बताया कि इस नियुक्ति आदेश से निगम का कोई संबंध नहीं है।


दो साल से नहीं निकली डाटा एंट्री ऑपरेटर की भर्ती

शिकायत में महाप्रबंधक ने बताया कि उनके पदस्थ होने के बाद पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड की ओर से डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर भर्ती के लिए कोई आवेदन आमंत्रित नहीं किया गया है। न ही इस पद पर किसी प्रकार का नियुक्ति आदेश जारी किया गया है। इतना ही नहीं, फर्जी पत्र में जिस कसडोल कार्यालय का उल्लेख किया गया है, वहां छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड का कोई कार्यालय भी संचालित नहीं है। इस कारण नियुक्ति पत्र को प्रथम दृष्टया पूरी तरह फर्जी पाया गया।


आदेश में नंबर और तारीख भी नहीं

महाप्रबंधक के मुताबिक फर्जी नियुक्ति पत्र में पत्र क्रमांक और तारीख भी अंकित नहीं थी। इसके बावजूद उसमें विभागीय भाषा और पदनाम का इस्तेमाल करते हुए नियुक्ति का आदेश दर्शाया गया था। इससे आशंका है कि फर्जी नियुक्ति पत्र के जरिए किसी व्यक्ति को सरकारी उपक्रम में नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी नियुक्ति पत्र किसने तैयार किया, इसे किसे भेजा गया और इसके पीछे किसी प्रकार की आर्थिक ठगी या नौकरी लगाने के नाम पर रकम वसूली का प्रयास तो नहीं किया गया।


विभाग की छवि खराब करने का आरोप

महाप्रबंधक ने अपनी शिकायत में कहा है कि अज्ञात व्यक्ति या संस्था ने उनके नाम और पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किया है। इससे न केवल उनके पद और हस्ताक्षर की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है, बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड जैसे सरकारी उपक्रम की छवि भी खराब हो रही है। उन्होंने पुलिस से फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार करने वाले व्यक्ति या संस्था का पता लगाकर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।


पुलिस ने चार धाराओं में दर्ज किया मामला

शिकायत की जांच के बाद तेलीबांधा पुलिस ने 1 सितंबर 2026 की रात 8:45 बजे एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत अपराध कायम किया है। पुलिस फर्जी नियुक्ति पत्र की प्रति, उसमें इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर और उसे वाट्सएप के माध्यम से भेजने वाले नंबरों की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।


मोबाइल नंबर और डिजिटल रिकॉर्ड से खुलेगा राज

पुलिस के लिए अब इस मामले में फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करने वाले तक पहुंचना महत्वपूर्ण है। इसके लिए पत्र भेजने वाले मोबाइल नंबर, वाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और नियुक्ति पत्र के डिजिटल स्रोत की जांच की जा सकती है। साथ ही पुलिस यह भी पता करेगी कि हेमंत साहू नामक व्यक्ति को वास्तव में नौकरी का झांसा दिया गया था या उसके नाम का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति ने किया।

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