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विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण, धूम्रपान और बदलती जीवनशैली के फेफड़ों पर पड़ने वाले असर के बारे में बताया, समय पर जांच और इलाज की अहमियत पर दिया जोर....

2 hours ago
3 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से:-

  • MMI Narayana Hospital, Raipur में फेफड़ों की सेहत और सांस से जुड़ी बीमारियों पर जागरूकता कार्यक्रम....

रायपुर: MMI Narayana Hospital, Raipur ने सांस की सेहत से जुड़े जागरूकता सप्ताह के दौरान “हर सांस, हर पल” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की। इसका उद्देश्य लोगों को फेफड़ों की सेहत, सांस से जुड़ी आम बीमारियों और उनसे बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करना था। चर्चा में विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और रोजमर्रा की कुछ आदतें फेफड़ों को कैसे प्रभावित कर सकती हैं और समय पर इलाज क्यों जरूरी है। इस चर्चा में डॉ. दिपेश मस्के (सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी), डॉ. आकांक्षा सरडा सक्सेना (एसोसिएट कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी), और डॉ. दिव्या मल्ले (एसोसिएट कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी) शामिल थीं। सत्र का संचालन डॉ. जितेंद्र चंद्राकर (कंसल्टेंट, इमरजेंसी मेडिसिन) ने किया। कार्यक्रम में मीडिया प्रतिनिधियों और विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया।


चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि लोग अक्सर फेफड़ों की सेहत पर तब ध्यान देते हैं, जब परेशानी बढ़ जाती है। लगातार खांसी, सांस फूलना या सांस लेते समय घरघराहट जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन्हें केवल मौसम, उम्र या थकान का असर मानने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञों ने बाहर और घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण के बारे में भी बात की। खाना बनाते समय निकलने वाला धुआं, सिगरेट का धुआं, वेपिंग और ई-सिगरेट फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और रूम फ्रेशनर से निकलने वाला धुआं या खुशबूदार कण भी कुछ लोगों में सांस की परेशानी बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों ने घर और काम की जगह पर प्रदूषण से बचने के आसान तरीके बताए। उन्होंने यह भी समझाया कि N95 मास्क प्रदूषण के कुछ कणों से बचाव में मदद कर सकता है, लेकिन यह हर तरह के प्रदूषण से पूरी सुरक्षा नहीं देता।


पैनल में अस्थमा और COPD जैसी बीमारियों से जुड़ी आम गलतफहमियों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अस्थमा केवल बचपन में ही नहीं, बल्कि बड़ों में भी हो सकता है। उन्होंने इनहेलर के सही इस्तेमाल और उससे जुड़ी चिंताओं को दूर करने पर जोर दिया। डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनहेलर का इस्तेमाल करना चाहिए और गलतफहमी या इसकी आदत पड़ने के डर से दवा अपने आप बंद नहीं करनी चाहिए। सांस से जुड़े संक्रमण और टीबी भी चर्चा के अहम विषय रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि लंबे समय तक खांसी रहने या दूसरे चिंताजनक लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। जरूरत के अनुसार टीकाकरण और बचाव के दूसरे उपाय भी अपनाने चाहिए। बुजुर्गों में निमोनिया का खतरा और उससे होने वाली परेशानियां अधिक गंभीर हो सकती हैं। मोटापा और नींद के दौरान सांस रुकने की समस्या, जिसे स्लीप एपनिया कहते हैं, भी फेफड़ों की सेहत को प्रभावित कर सकती है।


विशेषज्ञों ने फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान छोड़ने, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करने, प्रदूषण से बचने और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि केवल पल्स ऑक्सीमीटर से फेफड़ों की पूरी सेहत का पता नहीं लगाया जा सकता। स्पाइरोमेट्री नाम की जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि फेफड़े कितनी अच्छी तरह काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने बिना डॉक्टर की सलाह के भाप लेने, घरेलू या हर्बल नुस्खों और बाजार में आसानी से मिलने वाली खांसी की दवाओं का इस्तेमाल करने में भी सावधानी बरतने को कहा।


इस अवसर पर MMI Narayana Hospital, Raipur के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. एम. एम. माथवन ने कहा, “अच्छी सेहत के लिए फेफड़ों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है, लेकिन लोग अक्सर सांस से जुड़ी परेशानियों को तब तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जब तक वे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित नहीं करने लगतीं। वायु प्रदूषण, तंबाकू का धुआं, वेपिंग और जीवनशैली की कुछ आदतें हर उम्र के लोगों के फेफड़ों को प्रभावित कर सकती हैं। ‘हर सांस, हर पल’ जैसी पहल के जरिए हम लोगों को सही जानकारी देना, आम गलतफहमियों को दूर करना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए जागरूक करना चाहते हैं। सही जानकारी और समय पर इलाज से फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।”


कार्यक्रम का समापन फेफड़ों की सेहत का ध्यान रखने, परेशानी के शुरुआती लक्षणों को पहचानने और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज कराने के संदेश के साथ हुआ। इस पहल के जरिए MMI Narayana Hospital, Raipur ने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और समुदाय के साथ जुड़कर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अस्पताल ने लोगों को जीवन के हर पड़ाव पर फेफड़ों की सेहत को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया।

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