स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और सहज उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-
स्वास्थ्य सुधारों की प्राथमिकता और दीर्घकालिक कार्ययोजना पर जोर...
शीर्ष प्राथमिकता: हर नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार और दवाइयां मिलें
दीर्घकालिक योजना: भविष्य की आबादी और स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप अधोसंरचना का विस्तार
अंतिम छोर तक पहुंच: जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पुख्ता चिकित्सीय इंतजाम
वैकल्पिक परिवहन: दुर्गम और वनांचल क्षेत्रों में एम्बुलेंस न पहुंच पाने पर वैकल्पिक व्यवस्था
खाद्य सुरक्षा: त्योहारी सीजन में मिलावट के खिलाफ सघन जांच अभियान के निर्देश

प्रदेश के हर नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार, दवाइयां, जांच और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य सेवाओं के उच्चस्तरीय कामकाज की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के साथ सेवाओं की गुणवत्ता और अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चिकित्सा शिक्षा, आयुष और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अंतर्गत संचालित योजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। वर्तमान संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने और जहां भी चिकित्सकों, विशेषज्ञों या उपकरणों की कमी है, उन्हें प्राथमिकता के साथ दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य अधोसंरचना और सेवाओं का विस्तार -
प्रदेश की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया है। प्रत्येक जिले की भौगोलिक स्थिति और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर स्वास्थ्य संस्थानों का विस्तार किया जाएगा। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने और नवगठित जिलों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को प्राथमिकता से विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। चिकित्सा उपकरणों के नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग के लिए निगरानी व्यवस्था बनाई गई है ताकि उपकरण लंबे समय तक बंद न रहें। प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं और डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू तथा सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य और दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन -
गर्भवती माताओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण और सुरक्षित संस्थागत प्रसव पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्राथमिक एवं सामुदायिक केंद्रों में प्रसव से जुड़ी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम चल रहा है।
दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में एम्बुलेंस सेवा 108 और 102 का संचालन किया जा रहा है। जिन दुर्गम क्षेत्रों में सड़क मार्ग या भौगोलिक कठिनाइयों के कारण एम्बुलेंस का पहुंचना संभव नहीं है, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही, अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को शव वाहन की सुविधा सहजता से मिले, इसके लिए मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखने पर जोर दिया गया है।
सिकल सेल उन्मूलन और मानसिक स्वास्थ्य -
सिकल सेल आनुवंशिक बीमारी की रोकथाम के लिए जांच, परामर्श और जनजागरूकता का दायरा बढ़ाया जा रहा है। वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को पाने के लिए विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को समग्र स्वास्थ्य का हिस्सा मानते हुए समाज में जागरूकता बढ़ाने और परामर्श सेवाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
चिकित्सा शिक्षा और विशेष पाठ्यक्रम -
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार हो रहा है। वर्तमान में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 संस्थान संचालित हैं, और 6 नए मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति मिली है। शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 तथा फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या 1 से बढ़कर 7 हो गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार एलाइड हेल्थ से जुड़े 11 पाठ्यक्रम और रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी प्रारंभ की गई हैं।
त्योहारी सीजन में खाद्य सुरक्षा की सख्त निगरानी -
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को मिलावट के विरुद्ध प्रदेशभर में सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। मिठाई, दुग्ध उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण व विक्रय स्थलों की नियमित जांच की जाएगी। अमानक या मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी, क्योंकि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।






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