हाथी के हमले से वृद्ध की मौत, इलाके में दहशत....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में हाथियों की आक्रामकता थमने का नाम नहीं ले रही है। उदयपुर थाना अंतर्गत आने वाले महेशपुर गांव में गजराज के कुचलने से जख्मी हुए साठ वर्षीय ग्रामीण ने रायपुर के एक बड़े अस्पताल में दम तोड़ दिया। मृतक के पैतृक गांव में गमगीन माहौल के बीच उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस हृदयविदारक हादसे के बाद से पूरे इलाके के बाशिंदों में खौफ का साया है।
जलस्रोतों के पास हुआ था पाला -
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीते 6 अक्टूबर को महेशपुर निवासी मोहन गांव के ही तालाब की तरफ निकले थे। इसी दौरान उनकी मुठभेड़ हाथियों के झुंड से हो गई। जब तक वे संभलते, एक आक्रामक गजराज ने उन पर जोरदार प्रहार कर दिया। इस भयानक टक्कर में बुजुर्ग के सीने की हड्डियां और जबड़ा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। आनन-फानन में उन्हें उदयपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक मरहम-पट्टी के बाद गंभीर हालत को देखते हुए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था।
मेकाहारा में जिंदगी की जंग हारे -
अंबिकापुर से स्थिति में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने उन्हें राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) के लिए रेफर किया था। यहां लंबे समय तक वेंटिलेटर और चिकित्सीय देखरेख में रहने के बावजूद आंतरिक अंगों की भारी क्षति के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। सोमवार को उन्होंने इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। अगले दिन पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया।
ढाई दर्जन हाथियों का डेरा और फसलों की बर्बादी -
मौजूदा समय में उदयपुर के जंगलों और मैदानी इलाकों में लगभग पच्चीस हाथियों का एक बड़ा दल सक्रिय है। धान की फसल पककर तैयार होने के इस सीजन में हाथियों का यह झुंड लगातार खेतों को रौंद रहा है। कई किसानों के घरों को भी तहस-नहस किया जा चुका है। सालभर की मेहनत आंखों के सामने उजड़ते देख अन्नदाताओं की रातों की नींद उड़ चुकी है।
वन विभाग की अपील और बढ़ती चुनौती -
लगातार बिगड़ते हालात को भांपते हुए वन महकमे ने आसपास के सभी गांवों में मुनादी करा दी है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे जंगल के रास्तों पर जाने से बचें और हाथियों की मौजूदगी मिलते ही विभाग को सूचना दें। नुकसान का जायजा लेकर मुआवजा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन ग्रामीणों का जीवन और खेती दोनों ही खतरे में पड़े हुए हैं।






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