ईडी की कार्रवाई, रायपुर और दुर्ग में दो कारोबारियों के ठिकानों पर तलाशी...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर :- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और दुर्ग जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को दो प्रमुख कारोबारियों से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी। रायपुर में ज्वेलरी और जमीन कारोबारी से जुड़े नितिन डागा और दुर्ग में परिवहन कारोबारी गुलशन कुमार बघेल के परिसरों में यह कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने दोनों कारोबारियों के आवास और कार्यालयों की तलाशी ली, जहां वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों के रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की गई। शुरुआती रिपोर्ट्स में इस कार्रवाई को मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से जोड़ा गया है, हालांकि जांच के मूल कारणों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा अभी सामने आना बाकी है।
रायपुर में नितिन डागा के ठिकानों पर पड़ताल-
रायपुर के पंडरी क्षेत्र स्थित रवि नगर के 'सुशील विला' परिसर में ईडी के अधिकारियों की टीम पहुँची। यह परिसर कारोबारी नितिन डागा से जुड़ा हुआ बताया गया है। जानकारी के अनुसार, अधिकारियों ने परिसर के भीतर दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और जमीन के रिकॉर्ड की देर शाम तक जांच की। डागा का मुख्य कारोबार ज्वेलरी और रियल एस्टेट (जमीन) से जुड़ा है। फिलहाल शुरुआती चरण में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अधिकारियों को किन विशिष्ट वित्तीय लेन-देन या गतिविधियों की तलाश थी।
दुर्ग के ऋषभ ग्रीन सिटी स्थित गुलशन कुमार बघेल के आवास पर भी प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कार्रवाई की। जानकारी के मुताबिक, अधिकारियों ने परिसर में दस्तावेजों और अन्य कागजातों की जाँच की। गुलशन बघेल का संबंध परिवहन व्यवसाय और अन्य कारोबारी गतिविधियों से है। उनकी कंपनियों का जुड़ाव सड़क निर्माण, अर्थवर्क, मटेरियल हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टेशन सेवाओं से बताया जा रहा है। हालांकि, इन तमाम व्यावसायिक गतिविधियों में से किस विशेष लेन-देन को लेकर यह जांच की जा रही है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में छापों के दौरान जब्ती को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं:-
नितिन डागा: दैनिक रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 16 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है।
गुलशन बघेल: रिपोर्ट्स में उनके घर से लगभग 15 मोबाइल फोन, लैपटॉप और कुछ वित्तीय दस्तावेज जब्त किए जाने की बात कही गई है।
चूंकि इन सभी संभावनाओं पर आधिकारिक मुहर लगना बाकी है, इसलिए किसी एक विशेष मामले से इन छापों का संबंध जोड़ना अभी उचित नहीं है। ईडी के आधिकारिक विवरण के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह कार्रवाई किस जांच के दायरे में की गई है।






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