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शिक्षक भोजराज प्रधान के समर्पण से 70 गांवों के बच्चे पहुंच रहे सरकारी स्कूल....

Sep 6
5 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

पिथौरा विकासखंड: ‘तारे जमीन पर’ और ‘हिचकी’ जैसी फिल्मों में शिक्षक के उस प्रभाव को पर्दे पर दिखाया गया है, जो किसी बच्चे की जिंदगी की दिशा बदल देता है। लेकिन महासमुंद जिले के बसना से लगे पिथौरा विकासखंड में एक शिक्षक ऐसा भी है, जिसने यह साबित कर दिखाया कि किसी शिक्षक की ईमानदारी, लगन और सही दिशा देने की क्षमता वास्तविक जीवन में भी सैकड़ों बच्चों का भविष्य बदल सकती है। शासकीय प्राथमिक शाला मोहगांव के प्रधान पाठक भोजराज प्रधान का नाम आज ऐसे ही शिक्षक के रूप में सामने आता है, जिनके मार्गदर्शन में अब तक 130 बच्चे जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की चयन परीक्षाओं में सफलता हासिल कर चुके हैं।


आमतौर पर सरकारी स्कूल से बच्चे निजी स्कूलों की ओर जाते हैं, लेकिन भोजराज प्रधान सर के विद्यालय की कहानी इसके ठीक उलट है। उनके पढ़ाने और बच्चों को तराशने के तरीके का ऐसा प्रभाव पड़ा कि पालक निजी स्कूलों से अपने बच्चों की टीसी निकालकर उन्हें सरकारी स्कूल में दाखिल कराने लगे। भैरोपुर में पदस्थापना के दौरान 40 से 50 किलोमीटर दूर के पालक बच्चों को लेकर पहुंचे, वहीं मोहगांव आने के बाद 40 से 50 किलोमीटर तक दूर से पालक अपने बच्चों को शासकीय प्राथमिक शाला मोहगांव भेज रहे हैं। 


बच्चों को लाने-ले जाने के लिए एक स्कूल बस सहित चार वाहन संचालित हो रहे हैं। अमूमन शासकीय प्राथमिक विद्यालय दो या तीन गांव के बच्चे ही पढ़ते हैं लेकिन मोहगांव में वर्तमान में लगभग 70 गांवों के बच्चे यहां अध्ययनरत हैं। यह दृश्य अपने आप में बताता है कि एक समर्पित शिक्षक सरकारी स्कूल के प्रति समाज का विश्वास किस तरह वापस ला सकता है। भोजराज प्रधान ने वर्ष 2015 में शासकीय प्राथमिक शाला भैरोपुर में जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा की तैयारी शुरू कराई। 


प्रथम प्रयास में ही दो बच्चों के चयन के बाद यह सिलसिला आगे बढ़ता गया। बाद में सैनिक स्कूल और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की चयन परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू कराई गई। वर्ष 2016 में शाला प्रबंधन समिति, समुदाय और ग्राम पंचायत के सहयोग से डोंगरी (छोटी पहाड़) में बने विद्यालय जहां भारी भरकम हजारों टन वजनी पत्थर विद्यालय परिसर के मुख्य द्वार पर मौजूद था उसे रोज भोजराज प्रधान सहित एक अन्य शिक्षक रोज 7 बजे से 9 बजे तक महीनों तक छीनी, घन हथौड़ा चला कर तोड़ने में सफलता हासिल किया इसके बाद परिसर में 264 ट्रॉली मुरम और मिट्टी पाटकर बेहतरीन बाल उद्यान का निर्माण कराया। 


स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण, बेहतर पढ़ाई और अतिरिक्त कक्षाओं का परिणाम यह हुआ कि आसपास के पालक भी अपने बच्चों को भैरोपुर भेजने लगे। निजी स्कूलों से टीसी लेकर बच्चों को सरकारी स्कूल में भर्ती कराया गया। पालकों ने स्वयं के खर्च से स्कूल वाहन चलाए और विद्यालय की दर्ज संख्या 40 से बढ़कर 130 तक पहुंच गई। विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी के साथ प्रतिदिन एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा तथा अवकाश के दिनों में भी कक्षाएं संचालित होती रहीं। नैतिक शिक्षा, तीज-त्योहारों का आयोजन और निःशुल्क शैक्षणिक भ्रमण भी शिक्षा का हिस्सा बना। वर्ष 2023 तक भैरोपुर में रहते हुए उनके मार्गदर्शन में जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए 67, सैनिक स्कूल के लिए 4 और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के लिए 4, कुल 75 बच्चों का चयन हुआ। 


इस सफर में उनकी धर्मपत्नी रेखा प्रधान का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जो उच्च प्राथमिक शाला भैरोपुर में पदस्थ थीं। प्रधान सर एक घंटे की अतिरिक्त कक्षा लेते तो रेखा प्रधान बाल उद्यान को संवारतीं। दोनों शिक्षक दम्पत्ति सुबह 10 बजे विद्यालय पहुंचते और लाइट जलने के बाद ही घर लौटते थे। वर्ष 2020 के कोरोना काल से वे प्रतिदिन रात में निःशुल्क ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर अपने विद्यालय के बच्चों को मार्गदर्शन देते आ रहे हैं। अक्टूबर 2022 में प्रधान पाठक पद पर पदोन्नति के बाद भोजराज प्रधान की पदस्थापना शासकीय प्राथमिक शाला मोहगांव में हुई। यहां भी उन्होंने शाला प्रबंधन समिति, ग्राम पंचायत और ग्रामवासियों को साथ लेकर विद्यालय के कायाकल्प का काम शुरू किया। 


कुछ ही समय में बेहतरीन बाल उद्यान, डिजिटल कक्षा, पेपर ब्लॉक से सुसज्जित प्रार्थना स्थल और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की गईं। अपने माता-पिता की स्मृति में रंगमंच का निर्माण भी कराया। जून 2023 से लगभग 900 की आबादी वाले ग्राम मोहगांव में प्रवेश लेने की होड़ लग गई और विद्यालय की दर्ज संख्या मात्र 40 थी जो बढ़कर 166 हो गई। 40 से 50 किलोमीटर दूर से भी पालक स्कूल बस और वैन से बच्चों को भेजने लगे। मोहगांव में भी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का परिणाम सामने आया। मात्र तीन वर्षों में जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए 47, सैनिक स्कूल के लिए 4 और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के लिए 4 सहित कुल 55 बच्चों का चयन हुआ। भैरोपुर के 75 और मोहगांव के 55 मिलाकर अब तक कुल 130 बच्चे इन प्रतिष्ठित संस्थानों के लिए चयनित हो चुके हैं। 


इनमें नवोदय विद्यालय के 114, सैनिक स्कूल के 8 और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के 8 विद्यार्थी शामिल हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल बच्चों को सम्मानित करने के लिए प्रधान सर स्वयं सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें स्मृति चिन्ह और मेडल प्रदान करते हैं। उनका मानना है कि शिक्षक वह है जो बच्चों के स्तर तक पहुंचकर कठिन विषयों को सरल बनाए, शिक्षा को वास्तविक जीवन से जोड़े और बच्चों को मिल-जुलकर रहना सिखाए। उनके अनुसार हर बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक या प्रथम श्रेणी का अधिकारी बने, यह जरूरी नहीं; लेकिन उसे बेहतर इंसान बनाना शिक्षक की बड़ी जिम्मेदारी है।


कबीर ने कहा है—‘गुरु कुम्हार शिष कुंभ है।’ प्रधान सर की कार्यशैली इस पंक्ति को साकार करती दिखाई देती है। डिजिटल युग के अंतराल और संसाधनों के अभाव के बावजूद उन्होंने अनेक बच्चों को अवसरों की उस दुनिया तक पहुंचाया, जहां पहुंचना उनके लिए शायद आसान नहीं था। 


प्रधान सर का ध्येय वाक्य है—‘हर काम ईमानदारी से करो।’

उनका कहना है कि ईमानदारी से किया गया हर कार्य अच्छा हो जाता है। उनके विद्यालय का ध्येय वाक्य है—‘बच्चों का सर्वांगीण विकास और सरकारी स्कूल की तस्वीर बदलना।’ वे कहते हैं कि इस लक्ष्य को हासिल करने के महायज्ञ में विद्यालय के समस्त स्टाफ, पालक, शाला प्रबंधन समिति और ग्राम पंचायत का महत्वपूर्ण सहयोग है। शिक्षक दिवस पर भोजराज प्रधान की कहानी सिर्फ एक शिक्षक की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है कि यदि सरकारी स्कूल में शिक्षक अपने दायित्व को मिशन बना ले तो पालकों को निजी स्कूलों की ओर देखने की जरूरत नहीं पड़ती। और मात्र 40 की दर्ज संख्या से बढ़ कर 166 बच्चों की सफलता और 70 गांवों से सरकारी स्कूल में पहुंचते बच्चे इस बात के जीवंत प्रमाण हैं कि एक शिक्षक सचमुच पूरी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदलने की ताकत रखता है।

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