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राजधानी में बेखौफ नशा और सट्टा कारोबार, पुलिस कार्रवाई के बाद भी हालात जस के तस.....

Aug 7
4 min read
  • राजधानी के गली-गली में बेखौफ चल रहा सट्टा और नशे का कारोबार....

  • सटोरिए औऱ नशे के सौदागरों रात के अंधेरे में नही दिन के उजाले में बैखौफ होकर चला रहे ....

  • सट्टा पुलिस अपने मूल काम की जगह सटोरियों औऱ नशे के सौदागरों को संरक्षण दे रही छुटभैया नेताओं उपकृत की राजनीति में उलझकर पुलिस अपने मूल काम की जगह देने लगी संरक्षण.....

  • सट्टा, गांजा, शराब के अवैध कारोबार में अब नाबालिग बच्चों, महिलाओं को भी किया शामिल....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

रायपुर। राजधानी के गली-गली में सट्टा, नशे के कारोबार बेखौफ चल रहा है रोकने की कोशिश जरूर हो रही है लेकिन सट्टा औऱ नशेडिय़ों करा कारोबार सुरसा की तरह बढ़ते जा रहा है। छुटभैया नेताओं उपकृत राजनीति में उलझकर पुलिस अपने मूल काम की जगह सटोरियों औऱ नसे के सौदागरों को संरक्षण दे देती है जिसके कारण सटोरिए औऱ नशे के सौदागरों रात के अंधेरे में नही दिन के उजाले में बैखौफ होकर सट्टा चलवा रही है औऱ नशीली दवाई से लेकर अफीम-गांजा चरस की सप्लाई बढ़े ही आसान तरीके से कर रही है। पुलिस का पूरा तंत्र मुखबिर पर निर्भऱ है औऱ मुखबिर सटोरियों और नसे के सौदागरों पर निर्भऱ है। वो दोनों भरोसा दिलाकार दोनों जगह से माल कमाने में जुटा हुआ है। जगह जितना रोकने की कोशिश हो रही है उतना ही भारी तादात में इसका कारोबार फ़ैल रहा है। महिलाओं और बच्चो के माध्यम से अब ये समाज विरोधी लोग अपना कारोबार करने लगे हैं।


पहले खुद ही इन सब गंदे कामो को अंजाम देते रहे हैं लेकिन अब इस काम में महिला और बच्चो को भी लगा दिए हैं। बड़े सट्टेबाजों और नशे के सौदागरों को तो पुलिस धार पकड़ कर ही रही है लेकिन छोटे छोटे गली मोहल्लों में ये सब धंधे करने वालों को पुलिस पकड़ ही नहीं पा रही है या कुछ और बात है। इन छोटे सटोरियों एयर नशे के सौदागरों को छुटभैये नेताओं के हाथ उनके ऊपर होने के कारण पुलिस पकड़ ही नहीं पा रही है और यदि अधिकारियो के दबाव में पकड़ लेती है भी तो थाने स्तर से ही छूट जाते हैं।


बताया जाता है की ये छोटे अवैध कारोबारी इन सबका विशेष ध्यान देते हैं। जानकार लोग बताते हैं कि इसी वजह से इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती और इसी बात का ये फायदा उठाते हुए अपने काम को ठिकाना बदल बदल कर अंजाम देते रहते हैं। देखा जा रहा है कि राजधानी और आसपास इलाके में सट्टा, गांजा, और नशाखोरी का तेजी से विस्तार हो रहा है। राजधानी का ऐसा कोई इलाका नहीं है, जहां नशे के सौदागर, सटोरिए न हों। गली,मोहल्लों के अलावा वीआइपी रोड स्थित होटलों में नशे का करोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। राजधानी के वीआईपी रोड के अलावा अन्य होटल तो इन सबका अड्डा बन गया है। जहां होटल की केटेगिरी देखकर अलग अलग तबके के लोग इन सब कामों में लिप्त पाए जा रहे हैं। गांजा, अफीम, चरस, ब्राउन शुगर, शराब के साथ गली-गली में पनपते सट्टे के कारोबार पर रोक लगाने की मांग तो समाजसेवी करते ही रहते हैं लेकिन सट्टा गांजा जुआ शराब नशाखोरी है की रूक ही नहीं रही है। खुद पुलिस के आला अफसर भी कोशिश करते हैं कि इन सब पर अंकुश लगे इसके लिए जगह जगह छापामार कार्रवाई तो करते जरूर हैं लेकिन हालत जस का तस है। असामाजिक तत्वों ने अपने धंधों को चलाने के लिए जगह-जगह पर अड्डे बना लिए हैं। उनका संचालन बेखौफ किया जा रहा है। कालीबाड़ी चौक स्थित सुलभ शौचालय के आगे खाली मैदान में दिन और रात सट्टा, जुआ, गांजा, अवैध शराब और नशीली दवाई बेची जा रही हैं। पुलिस की निष्क्रियता के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस के आला अधिकारी असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने को लेकर लगातार अफसरों को चेताते जरूर हैं लेकिन फिर से अवैध कारोबार करने वाले मोहल्लों में सक्रिय हो जाते हैं और अपना अवैध कारोबार को बेखौफ होकर अंजाम देते हैं।


शाम होते ही इनकी दुकान सजती है पुरानी बस्ती के लाखेनगर चौक, नर्मदापारा, चूनाभ_ी, गुढिय़ारी के पहाड़ीपारा चौक, गोलबाजार थाने के ठीक सामने गली में, नेहरुनगर, कालीबाड़ी, पेंशनबाड़ा, ओसीएम चौक के पास, खमतराई ओवरब्रिज आदि स्थानों पर लंबे समय से सट्टा-पट्टी, शराब, गांजा बेचने का कारोबार चल रहा है। रहवासियों की शिकायत थाना पुलिस हमेशा नजरअंदाज कर देती है। तय अड्डों पर बैठे कोचिया खुलेआम देसी, अंग्रेजी शराब के साथ-साथ गांजा आदि बेच रहे हैं। शराब, गांजा बेचने का काम सुबह छह बजे से शुरू होता है और शराब दुकान खुलने के दो घंटे बाद तक चलता है। दोपहर एक बजे शराब की अवैध ब्रिकी बंद कर दी जाती है। फिर रात नौ बजे से दोबारा यह काम शुरु होता है, जो सुबह 4 बजे तक अनवरत चलते रहता है।


सट्टेबाजी और नशे के सामान मिलने के प्रमुख केंद्र जनता से रिश्ता दफ्तर में विभिन्न मोहल्ले के लोग शिकायत भी करते हैं की उनके मोहल्ले में सत्ता जुआ और नशे के सामान खुले आम बिक रहा है सब लोगों को दीखता है लेकिन पकडऩे वालों को कुछ नहीं दीखता समझ से परे है। पुरानी बस्ती, गंज, गोलबाजार, कोतवाली, खमतराई, गुढिय़ारी, तेलीबांधा, न्यू राजेंद्रनगर, कालीबाड़ी, नेहरूनगर, नयापारा, समता कालोनी के पीछे , कोटा, गुढिय़ारी खमतराई,भनपुरी कटोरा तालाब, ईदगाहभाठा, अश्वनी नगर,रामकुंड, कुकुर बेडा अदि जगहों में खुलेआम सटोरिए सट्टा-पट्टी काट रहे हैं। शराब-गांजा बेचने वाले भी बेधडक़ धंधा कर रहे हैं। शराब की दुकानों के बंद होने के बाद शराब का रेट तीन गुना तक हो जाता है। यही हाल राजधानी के अन्य मोहल्लों का भी है।

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