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निलंबित आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ विभागीय आरोप-पत्र...

1 hour ago
4 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद उनके खिलाफ विभागीय आरोप-पत्र जारी कर दिया गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पेश जवाब में इसकी जानकारी दी है। वहीं, शिकायतकर्ता महिला की आपत्ति के बाद आईपीएस प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला आईपीएस पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। इस मामले में 14 अक्टूबर को हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई थी।


राज्य शासन और डीजीपी की ओर से प्रस्तुत जवाब के बाद अदालत ने शिकायतकर्ता की याचिका का निराकरण कर दिया। हालांकि, विभागीय जांच अभी बाकी है और आरोप-पत्र जारी होने का अर्थ अंतिम दोषसिद्धि नहीं है। निलंबित आईपीएस रतनलाल डांगी के खिलाफ एक पुलिस उपनिरीक्षक (SI) की पत्नी ने यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता महिला का आरोप था कि डांगी पिछले सात वर्षों से उनका शारीरिक और मानसिक शोषण कर रहे थे। महिला ने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस मुख्यालय में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।


शिकायत सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई। इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर डांगी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। हाईकोर्ट में पेश जानकारी के मुताबिक, रतनलाल डांगी को 20 अप्रैल 2026 को विभागीय आरोप-पत्र जारी किया जा चुका था। इस मामले में शिकायतकर्ता महिला ने प्रारंभिक जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि जांच के दौरान ऐसी परिस्थितियां सामने आईं, जिनसे संबंधित आईपीएस अधिकारी को बचाने की कोशिश किए जाने की आशंका पैदा हुई। महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उन्होंने किसी महिला आईएएस अधिकारी से मामले की जांच कराने का अनुरोध भी किया था।


याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा था। इसके बाद राज्य शासन ने जांच और विभागीय कार्रवाई से संबंधित जानकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। विभागीय जांच के लिए पहले आईपीएस प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने की जानकारी दी गई थी। इस नियुक्ति पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि महिला उत्पीड़न से संबंधित इस संवेदनशील मामले में महिला अधिकारी को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। आपत्ति के बाद गृह विभाग ने प्रस्तुतकर्ता अधिकारी में बदलाव कर दिया। अब महिला आईपीएस पारुल माथुर विभागीय जांच में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की भूमिका निभाएंगी। इस जिम्मेदारी के तहत संबंधित रिकॉर्ड और साक्ष्य जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। यह बदलाव शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद किया गया है।


राज्य सरकार ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दीपांशु काबरा को मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। विभागीय प्रक्रिया में जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। जांच अधिकारी आरोपों तथा उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हैं, जबकि प्रस्तुतकर्ता अधिकारी विभाग की ओर से मामले से संबंधित दस्तावेज और अन्य सामग्री प्रस्तुत करते हैं। अब विभागीय जांच की आगे की कार्रवाई इन्हीं नियुक्त अधिकारियों की जिम्मेदारी में होगी। जांच पूरी होने के बाद संबंधित निष्कर्षों के आधार पर नियमानुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।


रतनलाल डांगी के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने के बाद राज्य शासन ने पहले उन्हें उनके पद से हटाया था। गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया था। इसके बाद डांगी को निलंबित भी कर दिया गया। हालांकि, रतनलाल डांगी ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताया था। अब प्रारंभिक जांच के निष्कर्षों और विभागीय आरोप-पत्र के बाद मामला आगे की जांच प्रक्रिया में है।


14 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान डीजीपी की ओर से बताया गया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ आरोप-पत्र जारी किया जा चुका है। इसके साथ ही अदालत को यह जानकारी भी दी गई कि शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बदल दिया गया है और महिला आईपीएस पारुल माथुर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। गृह सचिव और डीजीपी के जवाब पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित रिट याचिका का निराकरण कर दिया। यह आदेश जांच की प्रक्रिया से जुड़ा है। अदालत ने इस याचिका में यौन उत्पीड़न के आरोपों पर अंतिम दोषसिद्धि का फैसला नहीं सुनाया है।


इस पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण चरण विभागीय जांच का है। जांच अधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के जवाबों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ी है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा। इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से उठाए गए निष्पक्षता के सवालों के बाद प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बदला जाना भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। फिलहाल रतनलाल डांगी निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही जारी है।

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