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दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यक्रम: वीसी योगेश सिंह ने विस्थापन पर उठाए सवाल.....

Aug 15
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

दिल्ली भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि 1947 का बंटवारा सिर्फ़ भारत की सीमाओं को फिर से तय करने वाला राजनीतिक बंटवारा नहीं था, बल्कि इसने भारत की हज़ारों साल पुरानी सभ्यता और विरासत को भी खंडित कर दिया। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के 'सेंटर फ़ॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज़' (CIPS) द्वारा 'इंडियन काउंसिल ऑफ़ हिस्टोरिकल रिसर्च' (ICHR) के सहयोग से आयोजित 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' कार्यक्रम में बोल रहे थे। "भारत का विभाजन - विस्थापन, अलगाव और पुनर्वास की गाथा" थीम वाले और "भारत के विभाजन (1947) की कहानी" पर केंद्रित इस कार्यक्रम में राधाकृष्णन शामिल हुए, जबकि DU के कुलपति योगेश सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। ICHR के चेयरमैन राघवेन्द्र तंवर ने मुख्य भाषण दिया। राधाकृष्णन ने कहा, "बंटवारे ने सिर्फ़ सीमाएं ही नहीं बदलीं; इसने हमारी हज़ारों साल पुरानी सभ्यता को भी विभाजित कर दिया।" उन्होंने कहा कि धार्मिक आधार पर हुए बंटवारे ने भारत की विरासत को भी खंडित कर दिया, जिससे सिंधु नदी, करतारपुर साहिब, ननकाना साहिब, प्राचीन शक्तिपीठ, हड़प्पा और मोहनजो-दड़ो जैसी जगहें सीमा के दूसरी तरफ़ चली गईं।


उपराष्ट्रपति ने युवाओं से "विकसित भारत 2047" के निर्माण के मिशन में योगदान देने का आह्वान किया और राष्ट्रीय शक्ति व सुरक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद बंटवारे से बचे लोगों को सम्मानित किया और छात्रों से देश के सभ्यतागत इतिहास और विरासत को याद करते हुए "राष्ट्र प्रथम" की भावना रखने का आग्रह किया। योगेश सिंह ने बंटवारे के कारण हुए विस्थापन के पैमाने पर प्रकाश डाला और बताया कि लगभग 1.5 करोड़ लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मौतों की संख्या के कोई सटीक आंकड़े नहीं हैं और बंटवारे के लिए कोई पूर्व योजना नहीं बनाई गई थी। बंटवारे से जुड़ी परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए सिंह ने कहा, "आखिरकार, इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी की ज़िम्मेदारी किसकी थी?" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इतिहास को याद करना और उसकी समीक्षा करना ज़रूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।


राघवेन्द्र तंवर ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से स्कूली पाठ्यक्रम में बंटवारे पर बहुत कम ध्यान दिया गया है, और एक समय तो इस विषय को केवल 50-60 शब्दों में समेट दिया गया था। घटनाओं को गहराई से समझने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, "बंटवारे के पीछे की सच्चाई को समझना हर किसी के लिए ज़रूरी है।" तंवर ने बताया कि बंटवारे के दौरान 1.3 करोड़ से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए और 1 लाख से ज़्यादा महिलाओं का अपहरण कर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस त्रासदी का सबसे ज़्यादा बोझ आम नागरिकों ने उठाया, जबकि अमीर और प्रभावशाली वर्ग के लोग 1946 से ही पलायन करने लगे थे। उन्होंने आगे कहा कि देश ने असल में कभी भी बंटवारे के लिए सहमति नहीं दी थी। इस मौके पर ICHR की ओर से बंटवारे से जुड़ी तस्वीरों और समाचार रिपोर्टों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। कार्यक्रम के समापन पर, DU के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने मौजूद लोगों को 'नशा मुक्त भारत अभियान' की शपथ दिलाई।

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