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दिल्ली कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में किया बरी.....

Aug 3
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को कई महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने के मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा। राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने मामले की सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।


तोमर पर एक शिकायतकर्ता के आरोपों के संबंध में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506 पार्ट I के तहत मुकदमा चल रहा था। विस्तृत फैसले का इंतजार है। यह मामला जनवरी 2023 का है, जब विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया जैसे ओलंपियन पहलवानों ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और बृजभूषण पर यौन शोषण और डराने-धमकाने का आरोप लगाया था। पहलवानों ने WFI प्रमुख के तौर पर उनके इस्तीफे और फेडरेशन को भंग करने की मांग की थी।


इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा से शिकायत के बाद, मैरी कॉम और योगेश्वर दत्त जैसे मशहूर खिलाड़ियों की एक जांच समिति बनाई गई थी। हालांकि, WFI ने अपने तत्कालीन अध्यक्ष और कोचों के खिलाफ सभी आरोपों से इनकार किया था। इसके बाद केंद्रीय खेल मंत्रालय ने विवाद के बीच WFI के कामकाज को सस्पेंड कर दिया और तत्कालीन असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को किनारे कर दिया। मई 2024 में आपराधिक कार्यवाही ने गति पकड़ी, जब राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण और विनोद तोमर के खिलाफ आरोप तय किए। ट्रायल कोर्ट को पांच महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोपों पर पूर्व WFI प्रमुख के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत मिले।


बृजभूषण ने खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि वह निर्दोष हैं, इसलिए उन्होंने मुकदमे का सामना करने का फैसला किया। मुकदमे के दौरान, बृजभूषण ने FIR, चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का भी रुख किया था। हाई कोर्ट ने शुरू में मुकदमे की शुरुआत और आरोप तय होने के बाद याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए थे, लेकिन बाद में शिकायतकर्ताओं और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था। मुकदमा जारी रहने के दौरान भी याचिका लंबित रही।


यह मामला बृजभूषण के खिलाफ एक नाबालिग पहलवान द्वारा दर्ज कराए गए अलग POCSO मामले से अलग है। मई 2025 में, दिल्ली की एक अदालत ने उस मामले में दिल्ली पुलिस की कैंसलेशन रिपोर्ट (मामला बंद करने की रिपोर्ट) को मंज़ूरी दे दी, क्योंकि जांच एजेंसी ने कहा कि उसे आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। शिकायतकर्ता और उनके पिता ने कैंसलेशन रिपोर्ट का विरोध नहीं किया था। सोमवार के फ़ैसले के साथ ही, महिला पहलवानों की शिकायतों पर शुरू हुआ मुक़दमा ब्रज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर, दोनों के बरी होने के साथ खत्म हो गया। ट्रायल कोर्ट में ब्रज भूषण शरण सिंह और विनोद तोमर की ओर से वकील राजीव मोहन, ऋषभ भाटी और रेहान खान पेश हुए।


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