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दवाइयों व मेडिकल उपकरणों की खरीद में देरी पड़ी भारी....

Aug 6
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के ज़रिए की गई खरीद में कथित गड़बड़ियों और सरकारी अस्पतालों के लिए दवाइयों, ज़रूरी सामान और मेडिकल इक्विपमेंट की खरीद में लगातार देरी को लेकर हेल्थ सेक्रेटरी के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की है। भौगोलिक संदर्भ हेल्थ मिनिस्टर पंकज सिंह ने ORS पैकेट, हैंडहेल्ड पोर्टेबल X-रे मशीन और बेडशीट की खरीद पर एक विस्तृत और तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट मांगी है। खरीद में बार-बार होने वाली देरी, जिसका असर सरकारी अस्पतालों में हेल्थकेयर सर्विस पर पड़ा है, को लेकर एक अलग 'शो-कॉज़ नोटिस' भी जारी किया गया है।


हेल्थ मिनिस्टर ने ₹15 प्रति पैकेट की दर से ORS पैकेट की खरीद पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने पूछा है कि खरीद किस आधार पर की गई, खरीद का रिकॉर्ड कहाँ रखा जाता है, कॉन्ट्रैक्ट किस वेंडर को दिया गया और खरीद की दर, वेंडर डिस्काउंट, GST और अंतिम लागत सहित पूरा फाइनेंशियल ब्यौरा क्या था। नोटिस में ज़्यादा कीमतों पर लगभग 16 लाख बेडशीट की कथित खरीद के बारे में भी जानकारी मांगी गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट से 1 अप्रैल, 2025 से खरीदी गई बेडशीट की कुल संख्या, खरीद की दरें और स्पेसिफिकेशन, खरीद प्रक्रिया का ब्यौरा और अन्य सरकारी विभागों और पब्लिक अस्पतालों द्वारा इसी तरह की क्वालिटी वाली बेडशीट की खरीद दरों के साथ तुलना करने को कहा गया है।


हैंडहेल्ड पोर्टेबल X-रे मशीन की खरीद भी जांच के दायरे में आ गई है। आरोप है कि ये मशीनें 2026 में लगभग ₹33 लाख प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई थीं, जो अन्य सरकारी संस्थानों द्वारा चुकाई गई कीमतों से काफी ज़्यादा है। डिपार्टमेंट को मशीनों के टेक्निकल स्पेसिफिकेशन, खरीद की दरें और राज्यों, केंद्र सरकार के संस्थानों और अन्य पब्लिक हेल्थकेयर संगठनों से खरीद के तुलनात्मक डेटा जमा करने का निर्देश दिया गया है।


एक अलग 'शो-कॉज़ नोटिस' में, हेल्थ मिनिस्टर ने दवाइयों, ज़रूरी सामान और मेडिकल इक्विपमेंट की खरीद में बार-बार होने वाली देरी को लेकर भी हेल्थ सेक्रेटरी से सवाल किया है। नोटिस में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि बार-बार आधिकारिक निर्देश मिलने के बावजूद, डिपार्टमेंट ज़रूरी एक्शन प्लान और आइटम-वाइज़ खरीद की समय-सीमा पेश करने में नाकाम रहा। सबसे पहले 28 मई को निर्देश जारी किए गए थे, फिर 17 जून को एक नया आदेश जारी कर 19 जून की समय-सीमा तय की गई, और 22 जुलाई को तीसरा रिमाइंडर भेजा गया।


कारण बताओ नोटिस में कहा गया है कि बार-बार निर्देशों का पालन न करने से ज़रूरी खरीद प्रक्रियाओं की निगरानी में बाधा आई है और यह गंभीर प्रशासनिक चूक को दर्शाता है, जिससे सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। स्वास्थ्य सचिव से यह बताने को कहा गया है कि बार-बार दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया, 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' (Action Taken Report) समय पर क्यों नहीं सौंपी गई, और ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ 'आचरण नियमों' (Conduct Rules) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश क्यों न की जाए। स्वास्थ्य विभाग को 5 अगस्त तक अपना जवाब देने का निर्देश दिया गया था। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है। नोटिस की प्रतियाँ उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी भेजी गई हैं |



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