साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई: म्यूल बैंक खाता धारक गिरफ्तार...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
राजनांदगांव :- साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों के खिलाफ सिटी कोतवाली थाना पुलिस और साइबर सेल राजनांदगांव ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने 5 लाख 41 हजार 99 रुपये की साइबर धोखाधड़ी की रकम के लेनदेन में इस्तेमाल बैंक खाते के धारक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान दीपक शर्मा पिता स्व. मुरलीधर शर्मा, उम्र 58 वर्ष, निवासी मुरूम खदान लखोली अटल आवास के रूप में हुई है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल को देखते हुए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर और नगर पुलिस अधीक्षक सत्यप्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में सिटी कोतवाली और साइबर सेल की संयुक्त टीम द्वारा संदिग्ध बैंक खातों की जांच की जा रही है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर ऐसे बैंक खातों की पहचान की गई, जिनका कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम के लेनदेन के लिए उपयोग किया गया था।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि संबंधित बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त 5 लाख 41 हजार 99 रुपये को प्राप्त करने और आगे हस्तांतरित करने के लिए किया गया था। पुलिस का आरोप है कि खाता धारकों और सहयोगियों द्वारा रकम के धोखाधड़ी से प्राप्त होने की जानकारी होने के बावजूद उसे प्राप्त और उपयोग किया गया। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर सिटी कोतवाली थाने में अपराध क्रमांक 562/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(4), 317(5) और 3(5) में मामला दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान 20 सितंबर 2026 को पुलिस ने दीपक शर्मा को तलब कर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के बाद मामले में उसकी भूमिका सामने आने पर उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया। आरोपी को उसी दिन न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस अब इस प्रकरण से जुड़े अन्य आरोपियों और संदिग्धों की तलाश कर रही है।
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराध से प्राप्त रकम को प्राप्त करने, अलग-अलग खातों में भेजने या निकालने के लिए किया जाता है। साइबर अपराधी कई बार लोगों को कमीशन या बड़ी रकम का लालच देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ठगी की रकम पहले ऐसे बैंक खाते में जमा की जाती है और इसके बाद उसे कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इससे रकम के वास्तविक स्रोत और आगे उसके इस्तेमाल का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो सकता है।






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