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प्याज की कीमतों में उछाल से परेशान उपभोक्ता, बाजार में हर दिन बदल रहे भाव...

Aug 30
3 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

वाराणसी :- देश के कई हिस्सों में प्याज की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। वाराणसी समेत पूर्वांचल के बाजारों में प्याज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सब्जी की दुकानों पर प्याज की कीमत सुनकर ग्राहक हैरान हो रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में प्याज के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। दुकानदारों के अनुसार, जो प्याज कुछ दिन पहले तक 35 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर बिक रही थी, वही अब बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। अचानक बढ़े दामों ने आम उपभोक्ताओं का बजट बिगाड़ दिया है।


हर दिन बदल रहे प्याज के भाव सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि प्याज की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बाजार में प्याज हर दिन नए भाव के साथ पहुंच रही है। ग्राहक दुकानों पर पहुंचकर पहले प्याज का भाव पूछ रहे हैं और कीमत सुनने के बाद खरीदारी कम कर रहे हैं। कई परिवारों ने प्याज की खपत भी कम करनी शुरू कर दी है। हालांकि, वाराणसी में फिलहाल लहसुन और अदरक के दामों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इनकी कीमतें अभी सामान्य स्तर पर बनी हुई हैं।


महाराष्ट्र से होती है प्याज की आपूर्ति वाराणसी की मंडियों में प्याज की मुख्य आपूर्ति महाराष्ट्र के नासिक, राउरी और अहिल्याबाई क्षेत्रों से होती है। आढ़ती विक्रेता रवि सिंह ने बताया कि प्याज की आवक कम होने और स्टॉक में कमी के कारण कीमतों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार की ओर से प्याज का बड़ा स्टॉक रखा जाता था, लेकिन इस वर्ष स्टॉक की मात्रा कम होने से बाजार पर दबाव बढ़ा है। सरकारी स्टॉक में आई कमी | रवि सिंह के अनुसार, सरकार पहले करीब पांच लाख मीट्रिक टन प्याज का स्टॉक रखती थी, लेकिन इस साल यह मात्रा घटकर करीब एक लाख टन रह गई है।


उन्होंने कहा कि स्टॉक कम होने के साथ-साथ प्याज की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा है। मंडियों में आने वाली प्याज पहले की तुलना में कमजोर गुणवत्ता की बताई जा रही है। मंडी में प्याज की आवक घटी व्यापारियों के अनुसार, प्याज की आवक में भी कमी आई है। पहले वाराणसी मंडी में रोजाना करीब 25 गाड़ियां प्याज पहुंचती थीं, लेकिन अब यह संख्या घटकर करीब 15 गाड़ियों तक रह गई है।


एक ट्रक में लगभग 30 से 35 टन प्याज आती है। आवक कम होने से बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई है और इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। थोक बाजार पर नहीं है नियंत्रण थोक विक्रेता राहुल जायसवाल ने बताया कि वाराणसी और पूर्वांचल की अधिकांश मंडियां सेकेंडरी मंडियां हैं। उन्होंने कहा कि यहां के बाजार दूसरे राज्यों से आने वाली प्याज की सप्लाई पर निर्भर रहते हैं। जब मुख्य मंडियों में कीमत बढ़ती है तो स्थानीय बाजारों में भी उसका असर दिखाई देता है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर कीमतों को नियंत्रित करना मुश्किल होता है, क्योंकि सप्लाई और मांग के आधार पर भाव तय होते हैं। आम लोगों की बढ़ी परेशानी प्याज की बढ़ती कीमतों का असर सबसे ज्यादा मध्यम और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाली प्याज महंगी होने से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।


कई लोग अब कम मात्रा में प्याज खरीद रहे हैं। सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहक पहले की तुलना में कम प्याज खरीद रहे हैं, जिससे बिक्री पर भी असर पड़ा है। त्योहारों से पहले चिंता बढ़ी आने वाले त्योहारों के सीजन को देखते हुए प्याज की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बन गई हैं। त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि अगर मंडियों में प्याज की आवक नहीं बढ़ी तो कीमतें कुछ समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं।


कीमतों में राहत कब मिलेगी? व्यापारियों के अनुसार, प्याज की कीमतों में राहत के लिए जरूरी है कि मंडियों में आवक बढ़े और सप्लाई व्यवस्था बेहतर हो। अगर महाराष्ट्र और अन्य प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से प्याज की आपूर्ति सामान्य होती है तो आने वाले दिनों में कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। फिलहाल वाराणसी के बाजारों में प्याज के बढ़ते भाव ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। आम लोग अब सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जल्द कदम उठाए जाएं।

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