गीता ज्ञान यज्ञ का समापन: महापुरुषों के शस्त्र उठाने का उद्देश्य केवल धर्म की रक्षा - संकर्षण शरण...

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की क़लम से :-
रायपुर: माँ कामाख्या धर्मादा ट्रस्ट भारत वर्ष के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय गीता ज्ञान अमृत वर्षा कार्यक्रम के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ उठाया। इस धार्मिक आयोजन में संकर्षण शरण ने प्रवचन देते हुए जीवन में ईश्वर की उपस्थिति और गीता के सार को बहुत ही सरल भाषा में समझाया।
अधर्म के विनाश के लिए उठते हैं शस्त्र कथा के दौरान प्रसंग साझा करते हुए बताया गया कि भगवान कृष्ण और असामाजिक तत्वों द्वारा शस्त्र उठाने में मूल अंतर होता है। महापुरुष तभी शस्त्र धारण करते हैं जब समाज में धर्म की हानि होने लगती है। उनका उद्देश्य हमेशा न्याय और कल्याणकारी कार्यों की स्थापना करना होता है, जबकि इसके विपरीत अधर्मी लोग केवल अन्याय और अहंकार के लिए हिंसा का मार्ग चुनते हैं।
भक्ति मार्ग ही अंतिम गंतव्य वक्ता ने स्पष्ट किया कि भक्ति केवल एक मार्ग मात्र नहीं है, बल्कि यह जीवन की अंतिम मंजिल भी है। जब कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा और प्रेम के साथ सत्मार्ग पर आगे बढ़ता है, तो उसकी साधना उसे सीधे परमात्मा से जोड़ देती है। जिस प्रकार अर्जुन ने अपने इष्ट के विराट स्वरूप के दर्शन किए थे, वैसे ही सच्ची निष्ठा रखने वाला हर साधุमन इस परम चेतना को अनुभव कर सकता है।
संतुलित आहार और मानसिक शुद्धि का संबंध प्रवचन में खान-पान और जीवनशैली के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। यह समझाया गया कि मनुष्य का भोजन सीधे तौर पर उसकी मानसिकता को प्रभावित करता है। अत्यधिक तीखा, मसालेदार या तामसिक भोजन व्यक्ति को आलसी और रजोगुण-तमोगुण से ग्रसित बनाता है, जिससे स्वास्थ्य और विचार दोनों प्रभावित होते हैं। इसके विपरीत, सात्त्विक, ताजा और संतुलित भोजन करने वाले लोग हमेशा ऊर्जावान, स्वस्थ और सकारात्मक सोच वाले होते हैं।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कार्यक्रम के अंत में आरती और पूजन संपन्न हुआ। इसके साथ ही ट्रस्ट की ओर से एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें वासुदेव मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें चिकित्सीय परामर्श दिया। मीडिया प्रभारी कल्पना शुक्ला ने जानकारी दी कि इस त्रिदिवसीय अनुष्ठान के अंतिम दिन भव्य हवन और पूर्णाहुति के साथ पूरे कार्यक्रम का समापन किया गया।






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