सीएम रेखा गुप्ता ने गोयला डेयरी में 200 टन क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र का किया उद्घाटन.....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:- नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को राजधानी के गोयला डेयरी क्षेत्र में 200 टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस परियोजना का उद्देश्य डेयरी से निकलने वाले गोबर और जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना, स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना और पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना को वर्ष 2018 में मंजूरी मिलने के बावजूद लंबे समय तक पूरा नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के कारण विकास कार्यों को प्रभावित नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे सीधे तौर पर जनता को नुकसान उठाना पड़ता है।
आठ साल की देरी पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि गोयला डेयरी बायोगैस परियोजना को वर्ष 2018 में स्वीकृति मिली थी, लेकिन इसका उद्घाटन 2026 में हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई। मुख्यमंत्री के अनुसार, उस समय दिल्ली नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता थी। उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन सरकार को आशंका थी कि परियोजना पूरी होने पर इसका श्रेय भाजपा शासित नगर निगम को मिलेगा।रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि इसी राजनीतिक सोच के कारण महत्वपूर्ण परियोजना की प्रगति प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि राजधानी को स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर कचरा प्रबंधन की आवश्यकता थी, लेकिन राजनीतिक खींचतान के चलते जनता को इन सुविधाओं का लाभ मिलने में देरी हुई। हालांकि, परियोजना में देरी के लिए आम आदमी पार्टी सरकार की जिम्मेदारी संबंधी ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं।
प्रतिदिन 200 टन कचरे का होगा निस्तारण गोयला डेयरी में स्थापित बायोगैस संयंत्र की क्षमता प्रतिदिन लगभग 200 मीट्रिक टन गोबर और अन्य जैविक कचरे के प्रसंस्करण की है। इस संयंत्र के माध्यम से डेयरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले गोबर को उपयोगी ऊर्जा में बदला जाएगा।इससे एक ओर कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्वच्छ ईंधन के उत्पादन में भी मदद मिलेगी। परियोजना के तहत गोबर से बायोगैस तैयार की जाएगी और उससे निकलने वाले अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने में किया जा सकेगा। दिल्ली नगर निगम की योजना के तहत गोयला, घोघा और नंगली डेयरी क्षेत्रों में ऐसे संयंत्र विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी कुल प्रस्तावित प्रसंस्करण क्षमता 600 टन प्रतिदिन है।
यमुना नदी का प्रदूषण कम करने में मिलेगी मदद दिल्ली में डेयरी क्षेत्रों से निकलने वाला गोबर लंबे समय से पर्यावरण संबंधी चुनौती बना हुआ है। उचित निस्तारण व्यवस्था के अभाव में गोबर और अन्य अपशिष्ट नालों के माध्यम से यमुना नदी तक पहुंचते हैं। बायोगैस संयंत्र के संचालन से ऐसे कचरे को सीधे नालों में जाने से रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही डेयरी संचालकों को गोबर के व्यवस्थित निस्तारण का विकल्प भी उपलब्ध होगा। इस परियोजना से हरित ऊर्जा के उत्पादन और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है।
दिल्ली को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने पर जोर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि कचरे का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जा सके। सरकार का उद्देश्य राजधानी में कचरे के ढेर कम करना, स्वच्छ ऊर्जा के विकल्प विकसित करना और यमुना नदी को प्रदूषण से बचाना है। गोयला डेयरी में बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता नियमित संचालन, पर्याप्त मात्रा में गोबर की आपूर्ति और निर्धारित क्षमता के अनुरूप ऊर्जा उत्पादन पर निर्भर करेगी।






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