मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े भ्रम दूर करके जरूरत पड़ने पर मदद लेने में संकोच ना करें - (राजेश खलखो)....
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी - (राजेश खलखो - न्यायाधीश)....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण दिल्ली/ छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के आदेशानुसार एवं माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ सहअध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर चांपा के मार्गदर्शन में आज दिनांक 10/10/2026 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कचंदा में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता हेतु शिविर का आयोजन किया गया जहां राजेश खलखो न्यायाधीश/अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति जैजैपुर द्वारा बताया गया कि हम समाज के सभी वर्गों से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करने और इसे उतनी ही प्राथमिकता देने को कहा कि जितनी हम शारीरिक स्वास्थ्य को देते हैं विश्व मानसिक स्वास्थ्य महासंघ द्वारा निर्धारित इस वर्ष (2026) की थीम “ सुनी गई वास्तविक अनुभूतियां: वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव " है।

यह थीम इस बात पर जोर देती है कि मानसिक चुनौतियों से जूझ रहे लोगों के अनुभवों को सुनना और उन्हें बिना किसी पूर्वाग्रह या कलंक के स्वीकार करना कितना जरूरी है, आज मानसिक स्वास्थ्य एक बहुत बड़ी चिंताएं हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया का हर आठवां व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत में भी हर 10 में से लगभग 1 व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित है, उपस्थित लोगों को कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कमजोरी नहीं समझना चाहिए। समय पर परामर्श और संवाद से अवसाद और चिंता को नियंत्रित किया जा सकता है, साथ ही हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि विद्यालयों, कार्यस्थलों और परिवारों को ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करें जहाँ लोग खुलकर अपनी मानसिक स्थिति साझा कर सकें, इस अवसर पर हम यह संकल्प लें कि हम अपनों की सुनें, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े भ्रम दूर करें और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें।

लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल अधिकार मित्र द्वारा बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता देने के लिए नालसा (मानसिक बीमारी वाले व्यक्तियों और बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवाएं) योजना, 2024 काम करता है। इस योजना का मुख्य दिव्यांगों और मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को मुफ्त वकील और कानूनी सहायता का अधिकार है, साथ ही एलएसयुएम इकाई: हर जिले के पुलिस स्टेशनों और कानूनी सेवा प्राधिकरणों में इकाइयाँ बनाई गई हैं, ताकि पुलिस जांच और अदालती प्रक्रिया के दौरान इनकी सहायता की जा सके। मानसिक बीमारी का इलाज संभव: इस योजना के तहत् यह माना जाता है कि उचित दवा और देखभाल से मानसिक बीमारी ठीक हो सकती है, जबकि बौद्धिक दिव्यंग्यता (जैसे मानसिक मंदता) स्थायी प्रकृति की होती है। मानसिक रूप से बीमार और दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के बारे में बताते हुए कहा कि उनको मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत् सम्मान से जीने, दुर्व्यवहार से सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के साथ ही परिवार के साथ रहने का अधिकार और अमानवीय/क्रूर व्यवहार से संरक्षण प्राप्त है।

भगवती भारद्वाज अधिकार मित्र द्वारा बताया गया कि इस योजना के तहत् सहायता प्राप्त करने हेतु निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए नालसा के टोल-फ्री नंबर 15100 पर संपर्क करने, मानसिक स्वास्थ्य सहायता: मानसिक स्वास्थ्य परामर्श के लिए 14416 पर कॉल करके या स्थानीय अपने निकटतम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय, पैरालीगल वालेंटियर या पैनल अधिवक्ता से संपर्क कर निःशुल्क और सक्षम कानूनी सेवाएं प्राप्त करने के संबंध में जानकारी दिया गया।
इस कार्यक्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कचंदा के प्राचार्य पी. आर. कर्ष, समस्त शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें। #WorldMentalHealthDay #MentalHealthAwareness #JanjgirChampa #ChhattisgarhNews #LegalAwareness #NALSA #MentalHealthMatters #BreakingADNNews






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