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हर गांव में सुरक्षित हो बचपन: छत्तीसगढ़ में ग्राम स्तर पर मजबूत होगा बाल सुरक्षा तंत्र, आयोग ने दिए निर्देश...

58 minutes ago
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से :-

रायपुर/कोरबा: बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों को पुख्ता करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बाल अधिकारों की रक्षा और अपराधों पर लगाम कसने के लिए अब हर गांव और पंचायत स्तर पर मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाएगा। इसके तहत जमीनी स्तर पर विशेष समितियों के गठन की तैयारी शुरू हो चुकी है।


हाल ही में कोरबा जिले में एक गंभीर घटना सामने आई थी, जिसके बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवार के बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए। साथ ही, पीड़ित परिवार की गोपनीयता और सामाजिक गरिमा का पूरा ध्यान रखने पर जोर दिया गया है।


गांव और पंचायत स्तर पर बनेगा सुरक्षा कवच -

बढ़ते अपराधों पर चिंता जताते हुए आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल घटनाएं होने के बाद कार्रवाई करना नाकाफी है। इसके लिए जमीनी स्तर पर ऐसी व्यवस्था जरूरी है जो संभावित जोखिमों को समय रहते भांप सके।


इसी उद्देश्य के तहत ग्राम स्तर पर बाल सुरक्षा एवं सतर्कता समिति बनाई जाएगी। इस व्यवस्था में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पंचायत प्रतिनिधियों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय जागरूक नागरिकों को जोड़ा जाएगा। यह समिति बच्चों पर मंडराते खतरों की पहचान करेगी और समय रहते प्रशासनिक मदद या पुलिस तक सूचना पहुंचाएगी।


सामुदायिक जिम्मेदारी निभाने की अपील -

आयोग ने आधुनिक दौर में एकल परिवार संस्कृति और घटते सामाजिक संपर्कों को बच्चों की सुरक्षा में एक बड़ी चुनौती बताया है। समाज से आह्वान किया गया है कि पुरानी सामुदायिक आत्मीयता को फिर से जिंदा किया जाए, जहां पड़ोस और समाज का हर व्यक्ति बच्चों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझे।


पहचान और गोपनीयता रखना कानूनी दायित्व -

मीडिया और आम नागरिकों से विशेष अपील की गई है कि संवेदनशील मामलों में बच्चों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत किसी भी पीड़ित बच्चे का नाम, फोटो या पता सार्वजनिक करना कानूनी अपराध है। हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह बच्चों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा करे।

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