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चीफ जस्टिस सिन्हा का विदाई संदेश...जाने क्या !

Sep 5
2 min read

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-

बिलासपुर :- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा अपने सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित विदाई समारोह में भावुक हो गए। उन्होंने अपने संबोधन में न्यायपालिका की भूमिका और उसकी गरिमा पर जोर देते हुए कहा कि अदालतें केवल ईंट-पत्थर से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि आम आदमी की उम्मीद और न्याय का पवित्र मंदिर हैं। उन्होंने कहा कि पद और इंसान अस्थायी होते हैं, लेकिन न्यायिक संस्थाएं स्थायी रहनी चाहिए। शुक्रवार को आयोजित विदाई समारोह में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि न्यायिक संस्थाओं की साख और निष्पक्षता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।


उन्होंने न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अदालतों से आम नागरिक को न्याय की उम्मीद रहती है। इसलिए न्यायिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और निष्पक्षता हर परिस्थिति में कायम रहनी चाहिए। परिवार को दिया सफलता का श्रेय अपने विदाई संबोधन के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने अपनी न्यायिक यात्रा को याद किया और अपनी सफलता का श्रेय परिवार को दिया। उन्होंने विशेष रूप से अपनी पत्नी शालिनी सिन्हा का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार का प्यार, समझदारी और त्याग उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। उन्होंने कहा कि न्यायिक जिम्मेदारियों के दौरान कई तरह की चुनौतियां सामने आईं, लेकिन परिवार से मिले सहयोग और हौसले ने उन्हें हर चुनौती का सामना करने की शक्ति दी। उन्होंने अपनी पत्नी और परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनकी सफलता में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


29 मार्च 2023 को संभाली थी जिम्मेदारी जस्टिस रमेश सिन्हा ने 29 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। तत्कालीन राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने उन्हें शपथ दिलाई थी। करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बाद 4 सितंबर 2026 को वे सेवानिवृत्त हुए। चीफ जस्टिस के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने न्यायिक मामलों के निपटारे पर विशेष जोर दिया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, उनके कार्यकाल में कुल 50,228 मामलों का निपटारा किया गया। इनमें 369 से अधिक ऐसे फैसले भी शामिल रहे, जिन्हें नजीर बनने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों के रूप में दर्ज किया गया।


न्यायिक संस्थाओं को मजबूत रखने पर जोर अपने कार्यकाल के अंतिम संबोधन में चीफ जस्टिस सिन्हा ने न्यायपालिका की संस्थागत भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी न्यायिक संस्था की पहचान केवल उसके भवन या पद पर बैठे व्यक्ति से नहीं होती, बल्कि उसकी पहचान न्याय देने की प्रक्रिया, निष्पक्षता और लोगों के विश्वास से होती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक संस्थाओं की गरिमा और साख को बनाए रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, पद पर व्यक्ति बदलते रहते हैं और उनका कार्यकाल भी समाप्त होता है।


लेकिन संस्थाएं लंबे समय तक समाज के लिए काम करती हैं। इसलिए संस्थाओं की मजबूती और विश्वसनीयता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। विदाई समारोह में उनके कार्यकाल और न्यायिक योगदान को याद किया गया। करीब साढ़े तीन साल के कार्यकाल में हजारों मामलों के निपटारे और महत्वपूर्ण फैसलों के कारण उनका कार्यकाल न्यायिक प्रशासन की दृष्टि से उल्लेखनीय रहा। सेवानिवृत्ति के अवसर पर उनके भावुक संबोधन में न्यायपालिका के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और संस्थाओं की गरिमा को लेकर उनकी सोच साफ दिखाई दी।

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