छत्तीसगढ़ में स्कूलों का डिजिटल अटेंडेंस विवाद: 300 से अधिक कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सुगबुगाहट, DPI ने मांगे दस्तावेज....

ब्रेकिंग ADN न्यूज़:-
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति (डिजिटल अटेंडेंस) को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने राज्य के 24 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को एक पत्र जारी कर 300 से अधिक शिक्षकों और अन्य मैदानी अमले के खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, विभाग का स्पष्ट कहना है कि हाजिरी न दर्ज होने या गैर-हाजिर पाए जाने वाले सभी मामलों को सीधे तौर पर लापरवाही या अनधिकृत अनुपस्थिति नहीं माना जा सकता, क्योंकि इनमें तकनीकी अड़चनें और वैध अवकाश के प्रकरण भी शामिल हैं।
तकनीकी बाधाएं और फोन की दिक्कतें बनीं बड़ी वजह -
सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, ऑनलाइन अटेंडेंस न लग पाने के पीछे केवल मनमानी नहीं, बल्कि कई तकनीकी कारण भी जिम्मेदार हैं। कुल मामलों में से लगभग 90 प्रकरण ऐसे हैं जहां मोबाइल फोन न होना, कीपैड सेट का इस्तेमाल करना, आईफोन में विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) ऐप का सपोर्ट न करना, पुराना एंड्रॉइड वर्जन होना या डिवाइस खराब/गुम होना मुख्य वजह रही है। इसके अलावा, करीब 19 मामले ऐसे हैं जिनमें ऐप पर रजिस्ट्रेशन न कराने की बात सामने आई है, जबकि लगभग 182 मामले सीधे तौर पर स्कूल से अनुपस्थिति, मेडिकल लीव या लंबित छुट्टियों से जुड़े हुए हैं।
इन जिलों में सबसे अधिक संख्या -
विभाग की समीक्षा सूची के अनुसार प्रदेशभर के विभिन्न जिलों से मामले चिन्हित किए गए हैं:
रायगढ़: 48 मामले
कांकेर: 41 मामले
बिलासपुर: 33 मामले
सूरजपुर और कोरिया: 17-17 मामले
बलौदाबाजार: 16 मामले
रायपुर और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: 15-15 मामले
राजनांदगांव: 13 मामले
महासमुंद: 12 मामले
बालोद और बस्तर: 11-11 मामले
बीजापुर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और सुकमा: 10-10 मामले
प्रभावित कर्मियों की श्रेणियों में 177 शिक्षक, 99 गैर-शैक्षणिक कर्मचारी और 44 प्रधान पाठक शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सख्ती केवल शिक्षण कार्य से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं है।
15 दिनों में चार्जशीट और दस्तावेज भेजने के आदेश -
डीपीआई ने संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इन सभी प्रकरणों की गहन जांच कर आरोप-पत्र (चार्जशीट), आरोपों का विवरण और साक्ष्यों की सूची तैयार करें। यह पूरी प्रक्रिया 15 दिन के भीतर संचालनालय को भेजने के लिए कही गई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि चार्जशीट मिलने भर से किसी की सेवा समाप्ति या दोष सिद्ध नहीं हो जाता; कर्मचारियों के स्पष्टीकरण, उनके तकनीकी मुद्दों और अवकाश संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। विद्या समीक्षा केंद्र ऐप के जरिए डिजिटल मानिटरिंग का यह सिस्टम स्कूलों में पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर आ रही तकनीकी दिक्कतों ने मैदानी अमले की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।






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