छत्तीसगढ़ में अन्नदाताओं की समृद्धि से महक रहे गांव, खेती-किसानी को मिल रही नई रफ्तार...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
छत्तीसगढ़ की आर्थिकी की रीढ़ कहे जाने वाले अन्नदाता इन दिनों बदलाव और विकास के नए दौर से गुजर रहे हैं। धान के इस कटोरे में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कृषि क्षेत्र को संवारने के लिए बड़े पैमाने पर कदम उठाए गए हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों की सूरत बदलने लगी है।
हाल ही में सामने आए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन खरीफ विपणन सत्रों में लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी हुई है, जिसके एवज में किसानों के खातों में 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंचाई गई है। इस बड़े वित्तीय प्रवाह से केवल खेती-किसानी को ही बल नहीं मिला, बल्कि ग्रामीण बाजारों में भी रौनक बढ़ी है। छोटे कारोबार, खाद-बीज और कृषि उपकरणों की मांग में भी लगातार इजाफा दर्ज किया गया है।
पारदर्शी और सुगम हुई धान खरीदी व्यवस्था आगामी खरीफ सत्र के तहत 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। इस बार लगभग 27.50 लाख से अधिक किसानों से प्रति क्विंटल 3,100 रुपये की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जाएगा। किसानों की सहुलियत के लिए इस बार प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया गया है। जिन किसानों के पास एग्रीस्टैक आईडी उपलब्ध है, उन्हें दोबारा पंजीयन कराने से छूट दी गई है। साथ ही, समिति में ऋण पुस्तिका ले जाने की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। डिजिटल क्रॉप सर्वे और बायोमेट्रिक व्यवस्था के जुड़ने से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आएगी। प्रदेशभर में अब कुल 3,100 उपार्जन केंद्र काम करेंगे।
विविधीकरण और तकनीकी उन्नयन पर जोर पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर किसानों को अधिक लाभ देने वाली फसलों के प्रति आकर्षित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। धान के बदले अन्य लाभकारी फसलें उगाने वाले किसानों के लिए सहायता राशि को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया है। इसके अलावा, दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत बड़े पैमाने पर रकबा बढ़ाने और प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई है।
खेती की लागत घटाने के लिए यंत्रीकरण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में हजारों की संख्या में कृषि यंत्र और फार्म मशीनरी बैंक किसानों को उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए महंगे उपकरण तक पहुंच आसान हुई है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए ड्रिप और स्प्रinkler सिंचाई प्रणालियों का विस्तार करके पानी के सदुपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा और उर्वरकों की पुख्ता व्यवस्था मौसम के बदलते मिजाज और प्राकृतिक जोखिमों से किसानों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सुरक्षा कवच का काम कर रही है। लाखों किसानों को इसके तहत समय पर दावा भुगतान मिला है। वहीं, आगामी सीजन के लिए खाद और उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण पहले ही सुनिश्चित कर दिया गया है, ताकि बुवाई के समय किसी को असुविधा का सामना न करना पड़े।
छत्तीसगढ़ में करीब 40 लाख कृषक परिवार हैं, जिनमें से 82 प्रतिशत से अधिक लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं। ऐसे में कृषि क्षेत्र का मजबूत होना सीधे तौर पर प्रदेश की बहुसंख्यक ग्रामीण आबादी के आर्थिक स्वावलंबन से जुड़ा है। धान खरीदी, उन्नत सिंचाई, तकनीकी सहायता और फसल विविधीकरण के मिले-जुले प्रयासों से छत्तीसगढ़ के गांव और खेत एक मजबूत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।






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