छत्तीसगढ़ : भारी बारिश के बाद राहत के संकेत, मौसम अपडेट...

ब्रेकिंग ADN न्यूज़ :-
रायपुर: छत्तीसगढ़ में पिछले कई दिनों से हो रही झमाझम बारिश से लोगों को आज से कुछ राहत मिलने की संभावना है। राजधानी रायपुर में गुरुवार को बारिश थमने के बाद धूप निकल आई। हालांकि, पिछले 24 घंटों के दौरान हुई तेज बारिश से प्रदेश के नदी-नाले उफान पर आ गए हैं।
खारून नदी का जलस्तर बढ़ने से दुर्ग और रायपुर को जोड़ने वाला महादेव घाट स्थित पुल डूब गया। आसपास की निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिसके चलते कुंड में मूर्ति विसर्जन पर भी रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में भी कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, रविवार से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और इसके फैलाव में कमी आने की संभावना है।
आने वाले दिनों का मौसम -
मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। साथ ही, कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका भी बनी रह सकती है। अगले दो दिनों तक इसी तरह का मौसम रहने के आसार हैं। राजधानी रायपुर में 27 सितंबर को आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रहने (मेघमय) की उम्मीद है। इस दौरान एक-दो बार गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। शहर का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
पिछले 24 घंटों के बारिश के आंकड़े -
मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में दुर्ग में सर्वाधिक 20 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पिपरिया में 19, रायपुर शहर में 18, पखांजूर में 17 और गंडई व भिलाई में 16 सेंटीमीटर बारिश हुई। वहीं बोराई, बालोद, मंदिर हसौद, घुमका, धरसींवा, सिमगा, अर्जुन्दा और अंतागढ़ में 15-15 सेंटीमीटर वर्षा दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम बारिश हुई है।
मौसम प्रणाली (Weather System) की स्थिति -
मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे सटे उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बना दबाव (Depression) पिछले 6 घंटों के दौरान 25 किमी/घंटा की रफ्तार से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर तेजी से बढ़ा है। इसके उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर से होते हुए उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। अगले 12 घंटों के दौरान यह उत्तर प्रदेश के ऊपर धीरे-धीरे कमजोर होकर एक ‘स्पष्ट रूप से चिह्नित कम दबाव वाले क्षेत्र’ (Well-marked low-pressure area) में तब्दील हो सकता है।






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