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छत्तीसगढ़ में मलेरिया के खिलाफ निर्णायक बढ़त — 61.8% बिना लक्षण वाले मरीज समय पर पहचाने गए....

Jul 17, 2025
2 min read

पत्रकार अमृतेश्वर सिंह की कलम से:- 

  • बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा-सुकमा में शासन की रणनीति सफल — दूरस्थ अंचलों में भी पहुँच रही स्वास्थ्य सेवा


  • सक्रिय निगरानी, घर-घर स्क्रीनिंग और सामुदायिक भागीदारी से गढ़ा नया स्वास्थ्य मॉडल


रायपुर:- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान (12वां चरण) की अब तक की प्रगति से स्पष्ट है कि राज्य शासन की घर-घर स्क्रीनिंग रणनीति और सक्रिय जनसंपर्क के माध्यम से मलेरिया की जड़ पर प्रहार किया जा रहा है। 25 जून से 14 जुलाई 2025 तक हुए सर्वेक्षण में 1884 मलेरिया पॉजिटिव मरीजों की पहचान की गई, जिनमें से 1165 मरीज (61.8%) बिना लक्षण (Asymptomatic) वाले थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार की नीति स्पष्ट है—बीमारी की प्रतीक्षा मत करो, बीमारी से पहले पहुँचो। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह अभियान राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।


कुल 1,39,638 लोगों की मलेरिया जांच की गई। 1884 लोग पॉजिटिव पाए गए, जिनमें से 1165 (61.8%) बिना किसी लक्षण के थे — यानी यदि ये स्क्रीनिंग नहीं होती, तो संक्रमण आगे बढ़ता। कुल मामलों में से 75% से अधिक बच्चे हैं, जो विशेष रूप से संवेदनशील वर्ग हैं। 92% से अधिक मलेरिया केस Plasmodium falciparum (Pf) प्रकार के हैं — जिसकी त्वरित पहचान से गंभीर जटिलताओं को टाला गया।


दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ और भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण जिले में 12.06% लक्ष्य प्राप्ति दर और 706 मलेरिया पॉजिटिव मामलों की पहचान एक बड़ी सफलता है। खास बात यह है कि इनमें से 574 मरीज बिना लक्षण वाले (Asymptomatic) थे, जिन्हें शासन की सक्रिय रणनीति के कारण समय रहते उपचार उपलब्ध कराया गया। यह दिखाता है कि जंगल क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य तंत्र की पहुँच, निगरानी, और सेवा वितरण प्रभावशाली तरीके से हो रहा है।


सुकमा में 15,249 व्यक्तियों की जांच के दौरान 372 मलेरिया पॉजिटिव केस मिले, जिनमें से 276 मरीज बिना लक्षण वाले थे। यह आँकड़ा स्पष्ट रूप से बताता है कि शासन की प्रो-एक्टिव स्क्रीनिंग के चलते साइलेंट संक्रमण के चक्र को तोड़ा जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में भी मेडिकल एक्सेस और सामुदायिक भागीदारी के चलते संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा रहा है — यह प्रशासन की रणनीतिक सफलता है।


मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 12वें चरण अंतर्गत 27266 घरों में स्क्रीनिंग टीमों की पहुँच हुई। 1247 गर्भवती महिलाओं की जाँच की गई, जिनमें से मात्र 10 पॉजिटिव पाई गईं – यानी केवल 0.08%। LLIN (लार्ज लास्टिंग मच्छरदानी) का उपयोग 92% घरों में सुनिश्चित हुआ। Indoor Residual Spray कवरेज 68.73% तक पहुँचा। 614 घरों में मच्छर लार्वा मिलने पर त्वरित कार्रवाई की गई।


यह अभियान दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जागरूकता, समयबद्धता और पहुँच का नाम है। शासन द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से स्क्रीनिंग, मच्छर नियंत्रण, जागरूकता और फॉलोअप व्यवस्था के संयुक्त प्रयास से ही संभव हो सका है कि 61.8% बिना लक्षण वाले मरीजों को इलाज मिला और संक्रमण की कड़ी टूट सकी।


छत्तीसगढ़ सरकार आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि राज्य को मलेरिया मुक्त बनाना सिर्फ लक्ष्य नहीं, बल्कि वास्तविकता बने।

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